India has a weak PM

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H-1B वीजा फीस बढ़ी: विपक्ष के निशाने पर मोदी सरकार, राहुल बोले- भारत के पास कमजोर प्रधानमंत्री

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India has a weak PM: अमेरिका ने H-1B वीजा की फीस में भारी बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है।

इस बदलाव का असर सबसे ज्यादा भारतीयों पर पड़ेगा, जिसको लेकर भारत की राजनीति गरमा गई है।

विपक्षी दल कांग्रेस ने एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार और उनकी नीतियों पर हमला बोला है।

राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया X पर पोस्ट करते हुए पीएम मोदी को “कमजोर प्रधानमंत्री” बताया।

कांग्रेस सांसद ने 2017 का अपना पुराना पोस्ट भी शेयर किया, जिसमें आरोप लगाया था कि पीएम मोदी ने उस वक्त भी H-1B वीजा मुद्दे पर अमेरिका से कोई ठोस बात नहीं की थी।

राहुल गांधी ने कहा कि आज भी हालात वही हैं और भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को इसका खामियाजा उठाना पड़ रहा है।

खड़गे बोले- मोदी-मोदी नारे विदेश नीति नहीं

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पीएम मोदी ने अपने जन्मदिन पर देशवासियों को यह “रिटर्न गिफ्ट” दिया है, जिससे हर भारतीय दुखी है।

उन्होंने लिखा, राष्ट्रीय हित सबसे पहले है। गले मिलना और लोगों से मोदी-मोदी का नारा लगवाना विदेश नीति नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने आंकड़े भी पेश किए।

उन्होंने कहा कि 70% H-1B वीजा धारक भारतीय हैं और अब एक लाख डॉलर (करीब ₹88 लाख) की एप्लिकेशन फीस से भारतीय आईटी पेशेवरों पर सबसे बड़ा बोझ पड़ेगा।

उन्होंने आगे लिखा कि भारत पर 50% टैरिफ पहले ही लगाया जा चुका है और सिर्फ 10 सेक्टरों में ही भारत को ₹2.17 लाख करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है।

गौरव गोगोई का आरोप, मोदी की चुप्पी बोझ

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने भी पीएम मोदी की रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सरकार का यह फैसला भारत के प्रतिभाशाली लोगों के भविष्य को चोट पहुंचाता है।

गोगोई ने याद दिलाया कि जब अमेरिका में भारतीय महिला राजदूत का अपमान हुआ था, तो उस वक्त तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह ने सख्त जवाब दिया था।

लेकिन आज मोदी की “रणनीतिक चुप्पी” और “दिखावटी प्रचार” देश के राष्ट्रीय हितों पर बोझ बन गया है।

अमेरिका का फैसला: 1 लाख डॉलर फीस

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को व्हाइट हाउस में आदेश पर हस्ताक्षर किए।

जिसके बाद अब H-1B वीजा की एप्लिकेशन फीस एक लाख डॉलर यानी करीब 88 लाख रुपये हो गई है। इससे पहले यह फीस 1 से 6 लाख रुपये के बीच थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का सबसे ज्यादा असर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और कंपनियों पर पड़ेगा, क्योंकि H-1B वीजा धारकों में 70% भारतीय होते हैं।

 

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