प्रधानमंत्री मोदी का ‘परीक्षा पे चर्चा 2025’: तनाव नहीं, संतुलन पर जोर
नई दिल्ली में आयोजित परीक्षा पे चर्चा 2025 के आठवें संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को परीक्षा के तनाव से निपटने के लिए जीवन से जुड़े व्यावहारिक संदेश दिए।
इस वर्ष यह कार्यक्रम राजधानी की सुंदर नर्सरी में खुले वातावरण में आयोजित किया गया, जहां देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करते हुए 36 छात्रों ने भाग लिया।
संवाद के दौरान प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि जीवन का लक्ष्य केवल परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि जीवन में उत्कृष्टता हासिल करना चाहिए।
तकनीक का इस्तेमाल रील देखने तक सीमित न करें
छात्रों द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री ने तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी तकनीक के मामले में सौभाग्यशाली है, लेकिन उसका सही उपयोग समझना बेहद जरूरी है।
उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे केवल रील्स देखने या समय गंवाने के बजाय तकनीक की बारीकियों को समझें और उसका सर्वोत्तम उपयोग करें। प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीक यदि सही दिशा में इस्तेमाल हो, तो यह सीखने और आत्मविकास का सशक्त माध्यम बन सकती है।
बच्चों पर करियर का दबाव न बनाएं माता-पिता
कार्यक्रम में कई छात्रों ने माता-पिता द्वारा करियर चयन को लेकर बनाए जा रहे दबाव का मुद्दा उठाया। इस पर प्रधानमंत्री ने माता-पिता से अपील की कि वे बच्चों की रुचि और क्षमता को समझें, न कि समाज की अपेक्षाओं के अनुसार निर्णय लें।
उन्होंने कहा कि अक्सर सामाजिक प्रतिष्ठा और दूसरों से तुलना का दबाव माता-पिता बच्चों पर डाल देते हैं। प्रधानमंत्री ने महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि माता-पिता बच्चे की रुचि को पहचानकर उसका समर्थन करें, तो वही बच्चा असाधारण उपलब्धि हासिल कर सकता है। ]
साथ ही उन्होंने शिक्षकों से भी आग्रह किया कि वे छात्रों की तुलना न करें और हर छात्र की क्षमता को पहचानें।
अंकों से आगे कौशल को पहचानना ज़रूरी
लगातार अच्छे अंक लाने के दबाव से जुड़े सवालों पर प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जीवन में केवल अंक ही सब कुछ नहीं होते। उन्होंने छात्रों को अपनी प्रतिभा पहचानने और किसी एक कौशल पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि छात्र किसी क्षेत्र में रुचि रखते हैं चाहे वह कला हो, खेल हो या कोई अन्य कौशल—तो माता-पिता को उसे निखारने में सहयोग करना चाहिए और उस पर गर्व भी करना चाहिए। अंकों से अधिक महत्वपूर्ण जीवन में आत्मविश्वास और संतुलन है।
भावनाओं को दबाएं नहीं, परिवार से साझा करें
परीक्षा के तनाव और मानसिक दबाव से निपटने को लेकर प्रधानमंत्री ने छात्रों को अपनी भावनाएं साझा करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पहले के समय में संयुक्त परिवारों में बच्चे अपनी हर बात परिवार के सदस्यों से साझा करते थे, जिससे तनाव स्वतः कम हो जाता था।
आज भले ही परिवार की संरचना बदल गई हो, लेकिन बच्चों को अपने माता-पिता से खुलकर बात करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि भावनाओं को दबाकर रखना अवसाद का कारण बन सकता है, इसलिए संवाद बेहद आवश्यक है।
प्रकृति और ध्यान को जीवन का हिस्सा बनाएं
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने छात्रों के साथ पौधारोपण भी किया और जलवायु परिवर्तन पर चर्चा की। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रकृति से प्रेम और उसकी देखभाल जीवनशैली का हिस्सा बननी चाहिए।
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इसके साथ ही उन्होंने ध्यान और श्वसन तकनीकों का महत्व बताया और कहा कि ध्यान न केवल तनाव कम करता है, बल्कि जीवन में स्थिरता और संतुलन भी लाता है। प्रधानमंत्री के अनुसार, प्रकृति और ध्यान से जुड़ाव छात्रों को परीक्षा ही नहीं, जीवन की हर चुनौती से निपटने में मदद करता है।
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