PM Modi US Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने अमेरिका के दौरे पर जा सकते हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की सालाना बैठक में हिस्सा लेने के लिए सितंबर के आखिरी हफ्ते में पीएम मोदी न्यूयॉर्क पहुंच सकते हैं।
यह यात्रा सिर्फ एक किसी मंच पर भाषण देने भर तक सीमित नहीं होगी। पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी मुलाकात कर सकते हैं।
व्यापार और टैरिफ विवाद को सुलझाना मकसद
सूत्रों का कहना है कि इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच चल रहे व्यापार व टैरिफ विवाद को सुलझाना है।
उम्मीद जताई जा रही है कि अगर वार्ता सकारात्मक रही, तो दोनों नेता एक नई ट्रेड डील का ऐलान भी कर सकते हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, UNGA में पीएम मोदी का भाषण 26 सितंबर को तय है।
इसके अलावा वह कई देशों के नेताओं से द्विपक्षीय बैठकें करेंगे, जिसमें ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति भी शामिल हो सकते हैं।
फरवरी 2025 के बाद दूसरी मुलाकात
यह दौरा मोदी और ट्रंप के बीच सात महीने में दूसरी आमने-सामने की मुलाकात होगी।
इससे पहले फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री मोदी व्हाइट हाउस पहुंचे थे, जहां ट्रंप ने उन्हें टफ नेगोशिएटर बताते हुए उनकी व्यापारिक रणनीति की तारीफ की थी।
उस समय दोनों नेताओं के बीच दोस्ताना माहौल था, लेकिन इसके बाद हालात बदल गए।
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में टैरिफ और व्यापार मुद्दों पर तीखी बयानबाज़ी ने रिश्तों में तनाव पैदा कर दिया है।
लेकिन, अगले महीने होने वाली मोदी-ट्रंप मुलाकात में कृषि बाजार, रक्षा सहयोग, डिजिटल ट्रेड, और निवेश सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी बात हो सकती है।
भारत का रुख यह है कि किसी भी समझौते में उसके कृषि और डेयरी क्षेत्र के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
जबकि अमेरिका चाहता है कि भारत अपने बाजार में अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए अधिक खुलापन दे।
टैरिफ से बढ़ी अमेरिका-भारत के बीच दूरी
भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर महीनों से बातचीत चल रही है।
लेकिन कृषि और डेयरी क्षेत्र में भारत की शर्तों के चलते यह डील अटकी हुई है।
इसी गतिरोध के बीच अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर भारी शुल्क लगाने की कार्रवाई की।
30 जुलाई 2025 को ट्रंप ने 25% टैरिफ का ऐलान किया था।
6 अगस्त 2025 को एक और एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन करते हुए 25% अतिरिक्त टैरिफ जोड़ दिया, जिसे 27 अगस्त से लागू किया जाएगा।
कुल मिलाकर अब भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में 50% टैरिफ शुल्क लगेगा।
अमेरिका का कहना है कि यह कदम भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीद जारी रखने के कारण उठाया गया।
भारत ने इस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए चुनिंदा अमेरिकी उत्पादों पर 50% तक टैरिफ लगाने पर विचार शुरू कर दिया है।
अगर ऐसा होता है, तो यह अमेरिकी टैरिफ पर भारत का पहला औपचारिक जवाब होगा।
भारत का रूस से तेल खरीदना विवाद का कारण
यह विवाद महज़ व्यापार का मामला नहीं है, बल्कि इसमें भू-राजनीतिक पहलू भी गहराई से जुड़ा है।
यूक्रेन युद्ध के बीच भारत की ओर से रूस से तेल खरीद जारी रखना यूएस के लिए चिंता का विषय है।
अमेरिका का तर्क है कि इस खरीद से रूस को युद्ध के लिए जरूरी राजस्व मिलता है।
ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अगर भारत और अन्य बड़े खरीदार रूसी ऊर्जा आयात कम करें, तो मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा और युद्ध समाप्त करने की संभावना बढ़ेगी।
वहीं, भारत का जवाब साफ है कि अमेरिका खुद रूस से यूरेनियम, रसायन और उर्वरक खरीद रहा है, इसलिए इस मामले में वह दोहरे मापदंड अपना रहा है।
पुतिन और ट्रंप की बैठक पर भारत की नजर
भारत रूस से तेल खरीद रहा है अमेरिका इससे नाराज है, इसलिए भारत पर 50% टैरिफ लगा है।
इस पूरे विवाद के बीच डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन के बीच मुलाकात होने जा रही है।
15 अगस्त को अमेरिका और रूस के राष्ट्रपति के बीच होने वाली बैठक भारत के लिए भी बेहद अहम मानी जा रही है।
यह मुलाकात यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के संभावित रास्तों पर चर्चा के लिए होगी।
अगर पुतिन और ट्रंप के बीच युद्धविराम पर कोई ठोस प्रगति होती है, तो भारत की रूसी तेल खरीद को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव कम हो सकता है।
बहरहाल, उम्मीद जताई जा रही है कि पीएम मोदी का दौरा भारत-अमेरिका संबंधों के भविष्य को लेकर नए रास्ते खोलेगा।
टैरिफ और तेल के मुद्दे पर समाधान खोजने के लिए दोनों देशों के अधिकारी लगातार संपर्क में हैं।
लक्ष्य यह है कि 27 अगस्त से पहले कोई ऐसा समझौता हो जाए, जिससे टकराव और न बढ़े।
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