Impeachment Motion Against CEC

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संसद में वोट चोरी पर घमासान: विपक्ष ला सकता है मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग

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Impeachment Motion Against CEC: संसद का मानसून सत्र सोमवार को भी विपक्ष और सरकार के बीच टकराव से भरपूर रहा।

वोट चोरी और बिहार वोटर वेरिफिकेशन (SIR) को लेकर विपक्ष ने लोकसभा और राज्यसभा में जोरदार हंगामा किया।

विपक्षी सांसदों ने “वोट चोर-गद्दी छोड़ो” और “We Want Justice” जैसे नारे लगाए।

इसी बीच खबर है कि विपक्ष अब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहा है।

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के चेंबर में INDIA गठबंधन के नेताओं की बैठक हुई, जिसमें महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा की गई।

कांग्रेस सांसद सैयद नासिर हुसैन ने भी कहा कि पार्टी जरूरत पड़ने पर सभी लोकतांत्रिक विकल्पों का इस्तेमाल करेगी।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस पर अभी तक कोई औपचारिक निर्णय नहीं हुआ है।

विपक्ष का आरोप है कि बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर लाखों वोटरों के नाम काट दिए गए।

इससे लाखों पात्र मतदाता अपने अधिकार से वंचित हो सकते हैं।

राहुल गांधी का वार, चुनाव आयोग का पलटवार

कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस मुद्दे पर लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं।

उन्होंने पहले सोशल मीडिया पर ‘लापता वोट’ का मुद्दा उठाया और अब संसद में सीधे तौर पर बीजेपी और चुनाव आयोग पर निशाना साधा।

राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी वोट चोरी कर रही है और चुनाव आयोग उसका साथ दे रहा है। उनके आरोपों से संसद के भीतर माहौल और अधिक गर्म हो गया।

इन आरोपों पर चुनाव आयोग ने रविवार (17 अगस्त) को प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने साफ कहा कि वोट चोरी का आरोप पूरी तरह झूठा और निराधार है। इससे न तो आयोग डरता है और न ही मतदाता।

उन्होंने आगे कहा कि आयोग सभी दलों के लिए समान है, किसी के पक्ष या विपक्ष में नहीं।

राजनीतिक दलों का पंजीकरण चुनाव आयोग ही करता है, इसलिए निष्पक्षता उसकी पहली जिम्मेदारी है।

अब तक 28,370 मतदाता दावे और आपत्तियां दर्ज करा चुके हैं।

चुनाव आयोग ने लोगों से अपील की कि वे संविधान में मिले मतदान के अधिकार का हर हाल में प्रयोग करें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें।

सुप्रीम कोर्ट की दखलअंदाजी, संसद में हंगामा

बिहार में SIR के दौरान मतदाता सूची से करीब 65 लाख नाम हटा दिए गए थे। विपक्ष ने इसे वोट चोरी बताया और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

अदालत ने चुनाव आयोग को आदेश दिया कि हटाए गए सभी नामों की पूरी सूची वेबसाइट पर अपलोड की जाए और यह भी बताया जाए कि उन्हें किस कारण से हटाया गया।

आयोग ने कोर्ट को आश्वासन दिया है कि आदेश का पालन किया जाएगा।

दूसरी ओर लोकसभा में सोमवार को विपक्ष ने इतना हंगामा किया कि कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।

सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे। स्पीकर की चेतावनी के बावजूद विरोध थमता नहीं दिखा।

‘वोट चोरी’ विवाद अब राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सुप्रीम कोर्ट से लेकर संसद तक फैल चुका है।

एक तरफ चुनाव आयोग लगातार अपने पक्ष को साफ करते हुए पारदर्शिता पर जोर दे रहा है।

दूसरी ओर विपक्ष चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

 

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