नई दिल्ली
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के एक पोस्ट ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है. अखिलेश ने एक्स पर लिखा, "अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है." उनके इस बयान को राज्यसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि सपा अब राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए कोई और उम्मीदवार नहीं उतारेगी और उसका पूरा फोकस विधानसभा चुनाव पर रहेगा।
दरअसल, उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होना है और एक सीट जीतने के लिए 37 विधायकों के वोट चाहिए. मौजूदा तौर पर विधानसभा की प्रभावी संख्या 396 है. सपा के पास 98 विधायक हैं।
जेल में बंद रमाकांत यादव को वोटिंग की इजाजत नहीं मिलती है तो यह संख्या 97 रह सकती है. कांग्रेस के दो विधायकों का समर्थन मिलने पर सपा के पास 99 वोट हो सकते हैं. ऐसे में दो राज्यसभा सीटों के लिए जरूरी 74 वोट उसके पास आसानी से हैं।
तीसरी सीट के लिए 111 वोट की जरूरत
सपा अगर तीसरे उम्मीदवार को उतारती तो तीनों सीटें जीतने के लिए 111 प्रथम वरीयता वोट चाहिए होते. दो सीटें जीतने के बाद करीब 25 वोट बचते. ऐसे में तीसरी सीट जीतने के लिए कम से कम 12 और विधायकों के समर्थन
इसी नंबर को पूरा करने के लिए सपा की नजर विपक्षी और तटस्थ विधायकों पर थी. सुभासपा के तीन ऐसे विधायक, जिनकी पृष्ठभूमि सपा से जुड़ी रही है, उनके समर्थन की उम्मीद थी. सपा के कुछ बागी विधायकों के वापस आने की भी चर्चा थी. इसके अलावा आरएलडी, अपना दल और कुछ दूसरे गैर-बीजेपी विधायकों के रुख पर भी नजर थी।
अखिलेश के पोस्ट से बदल गया गेम
अखिलेश यादव पहले कह चुके थे कि तीसरा उम्मीदवार तभी उतारा जाएगा, जब जरूरी नंबर पूरा हो. लेकिन अब "तीन नहीं, चार सौ तीन" वाले पोस्ट के बाद संकेत मिल रहे हैं कि सपा ने तीसरी राज्यसभा सीट की दौड़ से पीछे हटने का फैसला कर लिया है।
ऐसे में राज्यसभा चुनाव में सपा की रणनीति फिलहाल दो सीटों तक सीमित होती दिख रही है, जबकि अखिलेश यादव की नजर अब उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर है।
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