MP UCC Bill: मध्य प्रदेश में UCC को मंजूरी: विवाह पंजीयन अनिवार्य, लिव-इन पर सख्त सजा और महिलाओं को समान अधिकार! जानिए मोहन सरकार के बड़े फैसले
मध्य प्रदेश में एक ऐसा फैसला लिया गया है, जिसकी चर्चा आने वाले कई वर्षों तक होने वाली है। प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को मंजूरी मिल चुकी है और डॉ. मोहन यादव की सरकार इसे एक नए युग की शुरुआत बता रही है।
महिलाओं को बराबरी का अधिकार, हर शादी का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन, जुबानी तलाक की परंपरा पर रोक और शादीशुदा होकर लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों के लिए जेल की सजा यह कानून राज्य के सामाजिक ढांचे को पूरी तरह बदलने वाला माना जा रहा है।
आखिर मध्य प्रदेश UCC में ऐसा क्या है, जो इसे इतना खास और ऐतिहासिक बनाता है? आइए समझते हैं इसके 4 सबसे बड़े प्रावधान।
MP UCC के 4 सबसे बड़े और महत्वपूर्ण प्रावधान
1. संपत्ति में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार
मोहन सरकार का कहना है कि समान नागरिक संहिता नारी सशक्तिकरण और सम्मान की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। नए नियमों के तहत अब संपत्ति में बेटियों को भी बेटों के बराबर हक दिया जाएगा। बेटा और बेटी के बीच कानूनी भेदभाव पूरी तरह खत्म करने की दिशा में इसे एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
2. विवाह का अनिवार्य पंजीयन (Mandatory Marriage Registration)
अब मध्य प्रदेश में होने वाली हर शादी का सरकारी रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) कराना अनिवार्य होगा। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को मजबूत कानूनी सुरक्षा मिलेगी। साथ ही, धोखाधड़ी और फर्जी विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों पर भी लगाम लगेगी।
3. शब्दों से तलाक (हलाला) की परंपरा पर पूर्ण विराम
तीसरा और सबसे अहम बदलाव यह है कि अब केवल शब्दों के आधार पर तलाक (हलाला) नहीं हो सकेगा। शादी खत्म करने के लिए सभी धर्मों के लोगों को तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। सरकार का तर्क है कि इससे महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा, न्याय और सम्मान तीनों मिलेंगे।
4. विवाहित होकर लिव-इन में रहे तो 5 साल की जेल!
चौथा बड़ा और सख्त प्रावधान लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर है। यदि कोई व्यक्ति पहले से शादीशुदा होते हुए किसी अन्य के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो उसके लिए 5 वर्ष तक की कैद का प्रावधान किया गया है। सरकार इसे पारिवारिक व्यवस्था की सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़कर देख रही है।
80% से अधिक मुस्लिम महिलाओं का समर्थन
UCC को लेकर राज्य में समाज के सभी वर्गों से सुझाव मांगे गए थे। सरकार के अनुसार, सुझाव समिति को मिले प्रस्तावों में 80 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम महिलाओं और लगभग 40 प्रतिशत मुस्लिम पुरुषों ने समान नागरिक संहिता का खुलकर समर्थन किया है।
सरकार का दावा है कि यह आंकड़े साबित करते हैं कि यह कानून किसी एक धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार और न्याय देने के लिए है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने क्या कहा?
समान नागरिक संहिता का मुख्य उद्देश्य राज्य के सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और न्याय सुनिश्चित करना है। हमारी सरकार संविधान की मूल भावना को धरातल पर उतारने का काम कर रही है।
— डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री (मध्य प्रदेश)
क्या मध्य प्रदेश बनेगा देश के लिए UCC का नया मॉडल?
उत्तराखंड के बाद अब मध्य प्रदेश में UCC का लागू होना देश की राजनीति में एक बड़ी हलचल पैदा कर रहा है। क्या मोहन यादव सरकार का यह मॉडल आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों के लिए एक नजीर बनेगा? यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि राज्य सरकार ने सामाजिक सुधार की दिशा में एक बेहद साहसिक और बड़ा कदम उठा दिया है।
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