“मदर ऑफ ऑल डील्स” जिससे भारत में होंगी कारें सस्ती, भारतीय कपड़े और IT सेक्टर को मिलेंगे नए बाजार…..
भारत को इस डील का मुख्य फायदा?
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर इन दिनों इंटरनेशनल लेबल पर चर्चाएं तेज है। इस समझौते को मदर ऑफ ऑल डील्स कहा जा रहा है। वजह है इसका दायरा और असर।
यह डील केवल आयात-निर्यात तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि ऑटोमोबाइल, कपड़ा, IT, निवेश और सेवाओं जैसे कई अहम सेक्टरों को प्रभावित करेगी। सरकार और यूरोपीय संघ के बीच इसे जल्द अंतिम रूप देने की कोशिशें लगातार चल रही है।
जानें EU के बारे में…
दरअसल, भारत और EU के बीच Free Trade Agreement पर बातचीत कई सालों से जारी है। यूरोपीय संघ 27 देशों का समूह है और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है। अगर यह समझौता होता है, तो यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी व्यापारिक डील मानी जा सकती है।
इसी वजह से इसे मदर ऑफ ऑल डील्स का नाम दिया गया है।
सबसे ज्यादा असर ऑटोमोबाइल सेक्टर पर पड़ने वाला है
इस डील का बड़ा असर ऑटोमोबाइल सेक्टर पर देखने को मिल सकता है। वर्तमान में यूरोप से आने वाली कारों पर भारत में भारी आयात शुल्क लगता है, जिससे उनकी कीमत काफी बढ़ जाती है। प्रस्तावित समझौते के तहत इन टैक्स में कटौती की संभावना है।
ऐसा होने पर यूरोपीय कारें भारतीय बाजार में सस्ती हो सकती हैं, जिससे ग्राहकों को फायदा मिलेगा और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
निर्यात बढ़ने के हैं फुल चांस
कपड़ा और परिधान उद्योग के लिए भी यह समझौता अहम माना जा रहा है। भारतीय टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स पर यूरोप में शुल्क और नियमों की वजह से निर्यात सीमित है। FTA लागू होने पर भारतीय कपड़े यूरोप में कम टैक्स के साथ पहुंच सकेंगे।
इससे निर्यात बढ़ने, उत्पादन में तेजी आने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
IT कंपनियों के लिए खुलेंगे रास्ते
सबसे महत्वपूर्ण लाभ IT और सर्विस सेक्टर को मिलने की संभावना है। यूरोप में भारतीय IT कंपनियों और प्रोफेशनल्स को वीजा, डेटा नियम और स्थानीय कानूनों से जुड़ी कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
इस समझौते के तहत अगर इन नियमों को आसान बनाया गया, तो भारतीय IT कंपनियों के लिए यूरोपीय बाजार और अधिक खुल सकता है।
इसके अलावा यह डील निवेश, ग्रीन एनर्जी, डिजिटल टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन को भी मजबूती दे सकती है। यूरोपीय कंपनियों के भारत में निवेश बढ़ने और तकनीक हस्तांतरण के रास्ते खुलने की संभावना जताई जा रही है।
समझौता हुआ सफल तो होगी अर्थव्यवस्था मजबूत
डील को लेकर डेटा सुरक्षा, पर्यावरण मानकों और कृषि क्षेत्र जैसे मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। इसके बावजूद सरकार और EU दोनों इसे रणनीतिक रूप से अहम मान रहे हैं।
अगर यह समझौता सफल होता है, तो ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ भारत की अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार में उसकी भूमिका को और मजबूत कर सकती है।
सवाल पॉलिटिक्स-वाला?
क्या ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ आम लोगों के लिए सच में सस्ती कारें लाएगी या फायदा सिर्फ बड़ी कंपनियों तक ही सीमित रह जाएगा? इस डील से भारतीय कपड़ा और IT सेक्टर को कितना वास्तविक लाभ मिलेगा और क्या छोटे उद्योग भी इसमें टिक पाएंगे? यूरोप के सख्त पर्यावरण और डेटा नियमों के बीच क्या भारत अपने हितों की पूरी तरह रक्षा कर पाएगा या नहीं?
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