तेहरान
ईरान और ब्रिटेन के बीच लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान ने ब्रिटेन की रॉयल नेवी (नौसेना), रॉयर एयर फोर्स (वायु सेना) और उसकी विदेशी खुफिया एजेंसी M16 के खिलाफ एक कड़ा फैसला लिया है।ईराने ने ब्रिटेन की सेना को आतंकवादी संगठन और खुफिया एजेंसी M16 को शत्रुतापूर्ण समूह करार दिया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्रालय ने रविवार को इन कदमों का एलान किया। इस फैसले के बाद अब ब्रिटेन का पूरा सैन्य और खुफिया तंत्र ईरानी सुरक्षा कानूनों के दायरे में आ गया है।
ब्रिटेन पर लगाए गंभीर आरोप
ईरान के विदेश मंत्रालय ने ब्रिटेन पर आरोप लगाया है कि वह अपने सैन्य अड्डो और लॉजिस्टिक सुविधाओं का इस्तेमाल करके तेहरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियानों में मदद कर रहा है। ईरान का कहना है कि ब्रिटेन की ये हरकतें अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन हैं।
ईरान की यह जवाबी कार्रवाई ब्रिटेन के उस फैसले के बाद आई है, जिसमें उसने जुलाई में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को अपने स्टेट थ्रेट्स एक्ट के दायरे में लाया था। ईरान ने इसे अपने खिलाफ एक शत्रुतापूर्ण कदम बताया था।
ईरान ने बताया पारंपरिक सिद्धांत
अपने इस फैसले का बचाव करते हुए ईरानी मंत्रालय ने कहा कि यह कदम पारस्परिकता के सिद्धांत और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उठाया गया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि इस फैसले के जो भी परिणाम होंगे, उसके लिए सीधे तौर पर ब्रिटिश सरकार जिम्मेदार होगी।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस घटनाक्रम से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव और गहरा सकता है, क्योंकि ईरान ने अपनी इस कार्रवाई का दायरा केवल ब्रिटेन की पारंपरिक सेना तक सीमित न रखकर उसकी खुफिया एजेंसी तक बढ़ा दिया है।
क्या है M16?
M16 (सीक्रेट इंटेलिजेंस सर्विस-SIS) ब्रिटेन की विदेशी खुफिया एजेंसी है। इसका मुख्य काम विदेश से जुड़ी खुफिया जानकारियां जुटाना, आंतकवादी नेटवर्कों और जासूसू गतिविधियों पर नजर रखना और देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संभावित खतरों की पहचान कर ब्रिटिश सरकार को सतर्क करना है।
You may also like
-
हैलोवीन पार्टी में कटे हुए हाथ के रूप में पहुंचीं हाइडी क्लम, डरावना लुक देखकर हैरान रह गए लोग
-
होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए ईरान का अमेरिका को 48 घंटे का अल्टीमेटम, रखीं कई शर्तें
-
इजराइल में सरकार गठन पर संकट, नए चुनाव टालने के लिए राष्ट्रपति हर्जोग ने की सभी दलों से अपील
-
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव का भारत पर असर, H-1B वीजा से टैरिफ और रक्षा सहयोग तक बदल सकते हैं समीकरण
-
नेतन्याहू को हटाने के लिए विपक्ष की बड़ी तैयारी, गादी आइसेनकोट बन सकते हैं नए प्रधानमंत्री
