नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने पाकिस्तान से संचालित 'शहज़ाद भट्टी नेटवर्क' पर बड़ा ऐक्शन लेते हुए उसे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन घोषित किया है। बुधवार (16 सितंबर) को गृह मंत्रालय (MHA) ने इसका ऐलान करते हुए कहा कि 'शहज़ाद भट्टी नेटवर्क' को गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया जाता है। गृह मंत्रालय ने कहा कि यह समूह हथियारों, विस्फोटकों और नशीले पदार्थों की सीमा-पार तस्करी में शामिल है, साथ ही यह युवाओं और छोटे-मोटे अपराधियों को आतंकवाद की ओर उकसाता भी है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय की तरफ से सोशल मीडिया एक्स पर एक आधिकारिक पोस्ट में कहा गया है, “आतंकवाद के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस (सख्त रुख) की प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी की सोच को आगे बढ़ाते हुए, गृह मंत्रालय ने UAPA के तहत शाहज़ाद भट्टी नेटवर्क को आतंकवादी संगठन घोषित किया है। यह समूह हथियारों, विस्फोटकों और नशीले पदार्थों की सीमा-पार तस्करी में शामिल है और युवाओं तथा छोटे-मोटे अपराधियों को आतंकवाद के लिए उकसाता है। भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और सांप्रदायिक सद्भाव को निशाना बनाते हुए, यह सिंडिकेट नफरत फैलाने वाला डिजिटल कंटेंट भी प्रकाशित करता था।”
क्या है शाहजाद भट्टी नेटवर्क?
गृह मंत्रालय के अनुसार, ‘शाहज़ाद भट्टी नेटवर्क (SBN)’ एक ऐसा संगठन है जिसका मकसद भोले-भाले युवाओं और स्थानीय अपराधियों को शामिल करके सीमा पार से हथियार, विस्फोटक और नशीले पदार्थों की तस्करी करना है। साथ ही, आतंकवादी गतिविधियों के ज़रिए देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, सांप्रदायिक सद्भाव और आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करना भी इसका मकसद है। इस साल के जश्न-ए-आजादी से ठीक पहले भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान से संचालित होने वाले इस आतंकी नेटवर्क के खिलाफ 14 राज्यों में एक साथ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की थी और उसके 200 से अधिक गुर्गों को गिरफ्तार किया था।
मंत्रालय के मुताबिक, 'शाहज़ाद भट्टी नेटवर्क (SBN)’ हिंसक गतिविधियों के ज़रिए आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ती है। साथ ही, यह संगठन भड़काऊ संदेश फैलाने के लिए अलग-अलग डिजिटल कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहा है, जो देश की अखंडता के लिए एक बड़ी चुनौती है। यह नेटवर्क सोशल मीडिया के जरिए देश भर में हिंसा और जासूसी का नेटवर्क फैलाता था। ये नेटवर्क इंस्टाग्राम-फेसबुक से 'आतंकी भर्ती' करता था। उसके निशाने पर जेन-जी यानी 18 से 23-30 साल तक के बेरोजगार युवक हुआ करते थे।
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