दिग्विजय सिंह ने शाजापुर में हिंदुत्व और सनातन धर्म को अलग बताते हुए बयान दिया। कहा- ‘मैं कभी हिंदुत्व का समर्थक नहीं था’! संविधान, मतदाता सूची और राम मंदिर चंदे पर भी उठाए सवाल।
शाजापुर: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने हिंदुत्व और सनातन धर्म को लेकर एक बार फिर अपनी राय रखी है। उज्जैन से अयोध्या तक निकाली जा रही उनकी ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ के शाजापुर पहुंचने पर उन्होंने मीडिया से बातचीत की।
इस दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह हिंदुत्व के समर्थक न पहले थे और न आगे रहेंगे। उनके इस बयान के बाद हिंदुत्व और सनातन धर्म के बीच अंतर को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।
दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में सनातन धर्म और हिंदुत्व को अलग-अलग अवधारणाएं बताया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की परंपरा हजारों साल पुरानी है, जबकि हिंदुत्व शब्द का संबंध वीर सावरकर की विचारधारा से है। पूर्व मुख्यमंत्री के मुताबिक, सनातन धर्म में कटुता और नफरत के लिए जगह नहीं होनी चाहिए।
उनका कहना है कि दोनों को एक ही अर्थ में देखना उचित नहीं है। उनके इस वक्तव्य को कांग्रेस की वैचारिक राजनीति और धार्मिक विमर्श के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
संविधान और मतदाता सूची को लेकर उठाए सवाल
मीडिया से चर्चा के दौरान दिग्विजय सिंह ने संविधान और नागरिकता से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को मतदान का अधिकार देता है और मतदाता सूची में नाम जोड़ने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है।
उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मतदाता सूची और मतदान प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाया। उन्होंने ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए नोट चोरी और वोट चोरी से जुड़े आरोप भी लगाए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना जरूरी है।
राजराजेश्वरी मंदिर में पूजा के बाद आगे बढ़ी यात्रा
शाजापुर में यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह ने मां राजराजेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद यात्रा का कार्यक्रम आगे बढ़ाया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शुभारंभ के दौरान वंदे मातरम और राष्ट्रगान का आयोजन हुआ।
यात्रा में कांग्रेस के कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेता भी शामिल रहे। उज्जैन से अयोध्या तक निकाली जा रही इस पदयात्रा को दिग्विजय सिंह धार्मिक और वैचारिक उद्देश्य से जुड़ा अभियान बता रहे हैं।
70 दिनों में अयोध्या पहुंचने का लक्ष्य
दिग्विजय सिंह की इस यात्रा के लगभग 70 दिनों में पूरी होने की संभावना जताई गई है। बताया गया है कि वह प्रतिदिन करीब 15 किलोमीटर पैदल चल रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने यात्रा को राम मंदिर के चंदे से जुड़े कथित विवाद के विरोध से भी जोड़ा है, जबकि पहले इसे पूरी तरह धार्मिक यात्रा बताया था।
अब उनके हिंदुत्व संबंधी बयान, संविधान पर टिप्पणियां और यात्रा का उद्देश्य मध्य प्रदेश की राजनीति में चर्चा के प्रमुख विषय बन सकते हैं।
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