ईरान के स्कूल पर हमले की जांच करने वाले पेंटागन दफ्तरों को कमजोर किया गया, नागरिक सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
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अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पेंटागन के उन निगरानी कार्यालयों को लगभग निष्क्रिय कर दिया है, जो हाल ही में ईरान के एक लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले की जांच कर सकते थे। आलोचकों का कहना है कि इस कदम से दशकों के सबसे बड़े अमेरिकी हवाई अभियान के दौरान नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अमेरिका की क्षमता कमजोर हो गई है।
पिछले साल हेगसेथ ने पेंटागन के कई ऐसे विभागों में कटौती की थी जिन्हें वे अपने “घातक सैन्य क्षमता” के लक्ष्य में योगदान नहीं देने वाला मानते थे। इनमें वह इकाई भी शामिल थी जो युद्ध के दौरान नागरिकों को होने वाले नुकसान के जोखिम को कम करने पर काम करती थी। इस इकाई को सिविलियन प्रोटेक्शन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कहा जाता है।
जानकारी के अनुसार, नागरिक हानि को कम करने से जुड़े लगभग 200 कर्मचारियों की संख्या घटाकर लगभग 90 प्रतिशत कम कर दी गई है। इसके अलावा अमेरिकी सेंट्रल कमांड में नागरिक हताहतों के मामलों को देखने वाली टीम, जो मध्य पूर्व क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालती है, 10 कर्मचारियों से घटकर केवल एक व्यक्ति तक सिमट गई है।
हेगसेथ इन कार्यालयों को पूरी तरह बंद नहीं कर सकते क्योंकि इन्हें अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी प्राप्त है। लेकिन अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों और संसाधनों में भारी कटौती के कारण ये कार्यालय अब लगभग काम करने की स्थिति में नहीं बचे हैं। यही वह समय है जब पेंटागन यह जांच कर रहा है कि ईरान में हुए उस हमले के लिए उसकी कितनी जिम्मेदारी बनती है, जिसे 2003 के बाद से अमेरिका के नेतृत्व वाले अभियान में नागरिकों की सबसे बड़ी मौतों में से एक माना जा रहा है।
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ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार 28 फरवरी को ईरान के मिनाब शहर में एक लड़कियों के प्राथमिक विद्यालय पर हुए हमले में लगभग 170 बच्चों और 14 शिक्षकों की मौत हुई थी।
पेंटागन में पहले नागरिक क्षति आकलन विभाग के प्रमुख रह चुके वेस ब्रायंट ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि यह बेहद अस्वीकार्य है कि रक्षा मंत्री और सेंट्रल कमांड के कमांडर यह भी स्पष्ट नहीं कर पा रहे कि उस स्थान पर बम गिराया गया था या नहीं। उनके मुताबिक इससे पूरे सैन्य अभियान की योजना और क्रियान्वयन में लापरवाही के संकेत मिलते हैं।
हेगसेथ का कहना है कि नागरिकों को निशाना न बनाने के लिए अमेरिका जितनी सावधानियां बरतता है, उतनी दुनिया का कोई और देश नहीं करता। लेकिन वे लंबे समय से युद्ध में कानूनी प्रतिबंधों की आलोचना करते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने सैन्य कार्रवाई से जुड़े नियमों को “बेवकूफी भरे” तक बताया दिया।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैनिकों के हाथ अब खोले जा रहे हैं ताकि वे दुश्मनों को डराने, कमजोर करने और खत्म करने के लिए पूरी ताकत से कार्रवाई कर सकें। उनके अनुसार अब “राजनीतिक रूप से सही” लेकिन अत्यधिक प्रतिबंधात्मक नियमों की जरूरत नहीं है, बल्कि युद्ध में अधिकतम प्रभावशीलता और सैनिकों को व्यापक अधिकार देना जरूरी है।
हालांकि रक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की नीति नागरिक हताहतों की जांच और जवाबदेही को कमजोर कर सकती है। उनका कहना है कि यह प्रवृत्ति 2025 में यमन में हाउती बलों के खिलाफ किए गए हमलों के दौरान भी दिखाई दी थी।
एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि असली सवाल यह है कि प्रशासन नागरिकों की सुरक्षा को कितना महत्व देता है। उनके अनुसार यदि सरकार वास्तव में इस मुद्दे को गंभीरता से लेती, तो नागरिक सुरक्षा से जुड़ा केंद्र बेहद उपयोगी साबित हो सकता था। लेकिन यदि प्राथमिकता ही नहीं दी जाती, तो ऐसे संस्थानों का अस्तित्व भी ज्यादा मायने नहीं रखता।
पेंटागन के प्रवक्ता राइली पोडलेस्की ने इन कार्यालयों में की गई कटौती पर सीधे टिप्पणी करने से बचते हुए केवल इतना कहा कि अमेरिका नागरिकों को नुकसान से बचाने के लिए कई सावधानियां बरतता है।
अमेरिका और इजराइल ने 11 दिन चले संघर्ष के दौरान ईरान में 5,000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए हैं। हेगसेथ ने कहा था कि मंगलवार का दिन हमलों के लिहाज से सबसे तीव्र दिन साबित हो सकता है।
ब्रिटेन की एक निगरानी संस्था एयरवार्स, जो दुनिया भर में हवाई हमलों की निगरानी करती है, के विश्लेषण के अनुसार ईरान के खिलाफ अभियान के शुरुआती 100 घंटों में ही इतने लक्ष्य पर हमले किए गए जितने अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन ने इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अभियान के पहले छह महीनों में नहीं किए थे।
लड़कियों के स्कूल पर हुआ हमला भी इसी शुरुआती अवधि में हुआ था। ईरान का दावा है कि स्कूल पर अमेरिकी मिसाइल से हमला किया गया था। स्कूल के पास इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का एक ठिकाना भी मौजूद था।
खुले स्रोतों से सामने आए वीडियो में एक टॉमहॉक मिसाइल को स्कूल की दिशा में जाते हुए देखा गया है। टॉमहॉक मिसाइल अमेरिका के अलावा केवल दो अन्य देशों ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के पास है और वे इस सैन्य अभियान में शामिल नहीं हैं। हालांकि हेगसेथ ने कहा है कि पेंटागन इस हमले की जांच कर रहा है, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि जांच किस कार्यालय द्वारा की जा रही है।
मानवाधिकार संगठन सेंटर फॉर सिविलियंस इन कॉन्फ्लिक्ट से जुड़ी एनी शील का कहना है कि रक्षा विभाग ने ऐसे समय में नागरिक सुरक्षा से जुड़े बेहद महत्वपूर्ण तंत्र को कमजोर कर दिया है जब उनकी सबसे अधिक जरूरत थी।
उनके अनुसार समस्या केवल कर्मचारियों की संख्या घटने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राथमिकता भी कम हो गई है। नीतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए संसाधन और राजनीतिक समर्थन पर्याप्त नहीं है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा अंततः आम नागरिकों को ही भुगतना पड़ता है।
हेगसेथ का युद्ध कानूनों के साथ संबंध पहले से ही विवादित रहा है। 2018 में वे फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम “फॉक्स एंड फ्रेंड्स” के सह-होस्ट थे और उस दौरान उन्होंने युद्ध अपराधों के आरोपों का सामना कर रहे चार अमेरिकी सैनिकों को बरी करने या माफी देने की मांग करते हुए कई कार्यक्रम किए थे।
उनकी टिप्पणियों ने तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ध्यान आकर्षित किया और बाद में एक नेवी सील कमांडो सहित तीन सैनिकों को रिहा कर दिया गया। इनमें से दो मामलों में आरोपियों की शिकायत उनके ही साथियों ने की थी।
इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने भी यह संभावना जताई कि स्कूल पर हुए हमले के लिए ईरान खुद जिम्मेदार हो सकता है, हालांकि उन्होंने इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध लगभग पूरा हो चुका है।
लेकिन अगले दिन हेगसेथ ने इस बयान को थोड़ा अस्पष्ट बना दिया। उनका कहना था कि अभियान कब समाप्त होगा, यह अमेरिका की समय सीमा और उसके फैसले पर निर्भर करेगा। उनके शब्दों में, यह तब खत्म होगा “जब हम चाहेंगे और जिस समय हम तय करेंगे।”
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