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भोपाल। कुंवर विजय शाह फिर काम पर लगे। कर्नल सोफिया कुरैशी पर गटरछाप भाषा पुरानी हुई। सुप्रीम कोर्ट की फटकार, देश की कर्नल का अपमान सब किनारे कर सरकार ने फिर शाह को मंत्री वाले काम शुरू करने का हुकम दे दिया है। शाह मंत्री पद पर तो बेशर्मी से बने ही हुए था, बस काम थोड़ा धीमा पद गया था। अब फिर काम मिला रफ़्तार और विजयी मुस्कान।
मालूम हो कि मध्यप्रदेश के जनजातीय मामलों के मंत्री कुंवर विजय शाह, जिन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर गटरछाप भाषा में टिप्पणी कर विवाद खड़ा किया था, की मुख्यधारा में वापसी हो गई है।
मंत्री होने के नाते उनको काम मिलना शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को उन्हें देवास जिले की खिवनी वाइल्डलाइफ सेंचुरी भेजकर पहला काम सौंपा, जहां बेदखली की कार्रवाई से गुस्साए स्थानीय आदिवासियों ने प्रदर्शन किया था।
याद रहे, शाह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की एसआईटी जांच कर रही है। शाह सार्वजनिक रूप से तब से नदारद थे, जब उनके खिलाफ 11 मई को महू (इंदौर) में कर्नल कुरैशी को ‘आतंकवादियों की बहन’ कहने पर एफआईआर दर्ज हुई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट व मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने उन्हें फटकारा था।
दरअसल, 23 जून को वन विभाग ने खिवनी अभयारण्य की 82 हेक्टेयर भूमि से ‘अवैध अतिक्रमण’ हटाने की कार्रवाई की थी। जिसमें आदिवासी परिवारों के कच्चे मकान तोड़े गए थे. इसके बाद आदिवासी समुदायों ने ‘मनमाने विस्थापन’ का विरोध किया।
इस मामले में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी दखल दिया और वह रविवार को प्रभावित आदिवासी परिवारों को अपने साथ मुख्यमंत्री यादव के पास ले गए. बहरहाल, वन विभाग और आदिवासियों से जुड़े इस विवाद के बहाने विजय शाह को काम सौंप दिया गया, जिसका शायद उन्हें इंतज़ार था.
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