Lucknow-Kanpur Expressway

Lucknow-Kanpur Expressway

4700 करोड़ की लागत से बना एक्सप्रेस-वे, 47 दिन भी नहीं टिका…!

Share Politics Wala News

4700 करोड़ रुपए की लागत से बना एक्सप्रेस-वे 47 दिन नहीं टिक पाया। 18 दिन में ही 84 जगह धंस गया।

उत्तर प्रदेश के सबसे महंगे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के महज 18 दिन बाद ही सड़क कई जगहों पर धंस गई है। 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे पर अब तक 84 स्थानों पर मरम्मत करनी पड़ चुकी है।

13 जुलाई 2026 को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करते हुए कहा था कि उत्तर प्रदेश के नेशनल हाईवे अमेरिका जैसे होंगे, लेकिन उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क पर गड्ढे, दरारें और धंसाव दिखाई देने लगे।

एनएचएआई के अनुसार, कानपुर लेन पर 39 और लखनऊ लेन पर 45 जगहों पर सड़क की मरम्मत की जा चुकी है। कई स्थानों पर सड़क को दोबारा उखाड़कर बनाया गया, लेकिन बारिश के बाद फिर दरारें दिखाई देने लगीं।

लखनऊ से करीब 30 किलोमीटर दूर बनी इलाके में लगभग 100 मीटर सड़क को दोबारा तैयार किया गया। इसके बावजूद कुछ घंटों बाद ही सड़क में दोबारा दरारें पड़ गईं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क के फाउंडेशन में इस्तेमाल की गई मिट्टी और निर्माण कार्य में अनियमितताएं हो सकती हैं। लखनऊ के वरिष्ठ इंजीनियर शैलेंद्र सिंह के मुताबिक, मिट्टी की परतों को सही तरीके से नहीं दबाया गया, जिसकी वजह से सड़क लगातार धंस रही है।

सड़क के किनारे बने शोल्डर, जो कटाव रोकने के लिए बनाए गए थे, वे भी कई जगहों पर टूट चुके हैं। बारिश के पानी की निकासी के लिए बनाई गई नालियां भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे के निर्माण पर लगभग 4700 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। यानी एक किलोमीटर सड़क बनाने में करीब 75 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। यह उत्तर प्रदेश का अब तक का सबसे महंगा एक्सप्रेस-वे माना जा रहा है।

एक्सप्रेस-वे का निर्माण पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड ने किया है। सड़क धंसने के बाद एनएचएआई ने कंपनी को नॉन-परफॉर्मर घोषित कर दिया है। कंपनी के तीन अधिकारियों को हटा दिया गया है और अगले दो वर्षों के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। मामले की जांच अब आईआईटी खड़गपुर की टीम करेगी।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे सरकार के विकास मॉडल का प्रतीक माना जा रहा था। उद्घाटन के दौरान इसे देश के सबसे मॉडर्न एक्सप्रेस-वे में गिना गया, लेकिन महज 18 दिनों में ही इसकी हकीकत सामने आ गई

4700 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद सड़क का बार-बार धंसना कई सवाल खड़े करता है। क्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में कमी थी? क्या निर्माण कार्य में जल्दबाजी की गई? क्या निगरानी एजेंसियों ने अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से निभाई?

यह भी पढ़ें- निर्दोष होने की सजा…. 22 साल…!

निर्दोष होने की सजा…. 22 साल…!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *