धामनोद
शासकीय अस्पताल परिसर का अंदरूनी मार्ग जो वर्षों से गड्ढों के कारण मरीजों के लिए परेशानी बना हुआ था, वह अब दुरुस्त हो गया है। नगर के कुछ समाजसेवियों ने मंगलवार रात करीब छह घंटे में 200 मीटर लंबे मार्ग का अपने स्तर पर डामरीकरण करा दिया। इस दौरान न कोई भूमिपूजन हुआ, न प्रचार और न ही काम कराने वालों ने अपना नाम सार्वजनिक किया।
स्ट्रेचर ले जाने में होती थी दिक्कत
अस्पताल परिसर का यह मार्ग लंबे समय से जर्जर था। जगह-जगह गड्ढे होने से मरीजों को स्ट्रेचर से एक वार्ड से दूसरे वार्ड तक ले जाने में दिक्कत होती थी। बरसात में गड्ढों में पानी भर जाने से स्थिति और खराब हो जाती थी। दोपहिया वाहन चालकों के साथ ही गंभीर मरीजों के स्वजन को भी आवागमन में परेशानी होती थी। मार्ग सुधार को लेकर कई बार मांग भी उठी, लेकिन लंबे समय तक कोई पहल नहीं हुई।
रात 10 से सुबह चार बजे तक चला काम
समाजसेवियों ने मरीजों की परेशानी को देखते हुए स्वयं पहल की। मंगलवार रात करीब 10 बजे डामरीकरण का काम शुरू हुआ, जो रातभर चला और सुबह चार बजे तक पूरा कर लिया गया। बुधवार सुबह जब मरीज और स्वजन अस्पताल पहुंचे तो गड्ढों की जगह डामरीकृत सड़क देखकर वे हैरान रह गए।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार इस मार्ग से रोजाना सैकड़ों मरीज और उनके स्वजन गुजरते हैं। नए रास्ते से अब एंबुलेंस और स्ट्रेचर की आवाजाही आसान हो गई है।
प्रशासन ने सराहा, रखरखाव की कही बात
इस संबंध में संबंधित अधिकारियों ने कहा कि `अस्पताल परिसर के अंदरूनी मार्ग के लिए हमने कई बार पत्राचार किया था, लेकिन बजट अभाव के कारण काम नहीं हो पा रहा था। समाजसेवियों द्वारा कराए गए इस कार्य से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। अब अस्पताल प्रशासन द्वारा इस मार्ग के रखरखाव की जिम्मेदारी ली जाएगी।`
समाजसेवियों ने बताया कि `अस्पताल आने वाले मरीजों को हो रही परेशानी देखी नहीं गई। इसलिए बिना किसी प्रचार के यह काम कराया गया है।` उन्होंने आगे भी अस्पताल में साफ-सफाई और अन्य जरूरी सुविधाओं में सहयोग करने की बात कही।
सेवा का उदाहरण बना धामनोद
आमतौर पर सार्वजनिक कार्यों में भूमिपूजन और प्रचार की होड़ रहती है। ऐसे में बिना नाम और प्रचार के कराया गया यह डामरीकरण क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
समाजसेवी ने रातों-रात सुधार सामग्री लाकर सड़क सुधरवा दी
समाजसेवी अस्पताल में आते-जाते रहते थे। वह देखते थे कि अस्पताल परिसर पहुंचने में सड़क का हिस्सा गड्ढों में तब्दील था, जिसे समाजसेवी ने रातों-रात सुधार सामग्री लाकर सड़क सुधरवा दी। उन्होंने इसे गुप्तदान कहकर नाम उजागर नहीं करने का निवेदन किया है। -कीर्ति बोरासी, सीबीएमओ, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धामनोद
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