14 राफेल सौदे को DAC की मंजूरी, 90 विमान भारत में 50% स्वदेशी हिस्सेदारी के साथ बनेंगे
114 राफेल को मिली हरी झंडी
भारत की सैन्य शक्ति को बड़ा संबल देते हुए रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह सौदा फ्रांस के साथ अंतर-सरकारी समझौते के तहत होगा।
खास बात यह है कि कुल 114 विमानों में से 90 का निर्माण भारत में किया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा प्रस्तावित है, जिससे इस रक्षा सहयोग को कूटनीतिक मजबूती भी मिलेगी।
‘मेक इन इंडिया’ को बड़ा प्रोत्साहन
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में बनने वाले 90 विमानों में लगभग 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा। पहले यह प्रतिशत 30 के आसपास चर्चा में था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर लगभग आधा कर दिया गया है।
इससे देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को नई गति मिलेगी। साथ ही भारत को इन विमानों में अपने स्वदेशी हथियार और तकनीकी प्रणालियां एकीकृत करने की पूरी स्वतंत्रता होगी, जिससे रणनीतिक आत्मनिर्भरता और मजबूत होगी।
वायुसेना की ताकत और स्क्वाड्रन गैप
भारतीय वायुसेना की वर्तमान स्क्वाड्रन संख्या 29 है, जबकि स्वीकृत संख्या 42 है। ऐसे में राफेल विमानों की नई खेप इस कमी को पाटने में अहम भूमिका निभाएगी।
यह सौदा तब तक वायुसेना की क्षमता को संतुलित रखेगा, जब तक स्वदेशी परियोजनाएं एलसीए एमके-1ए, एलसीए एमके-2 और एएमसीए—पूरी तरह तैयार नहीं हो जातीं।
एएमसीए के 2035 के बाद सेवा में आने की संभावना है, इसलिए यह खरीद अंतरिम समाधान के रूप में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नौसेना को मिलेंगे 6 अतिरिक्त P-8I विमान
DAC ने भारतीय नौसेना के लिए अमेरिका से छह अतिरिक्त P-8I समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी विमान खरीदने की भी मंजूरी दी है।
ये विमान लंबी दूरी की समुद्री निगरानी, पनडुब्बी खोज और मारक क्षमता के लिए जाने जाते हैं। हालांकि यह खरीद पूरी तरह ‘फ्लाई-अवे’ स्थिति में होगी और इसमें तकनीकी हस्तांतरण या ऑफसेट की शर्तें शामिल नहीं होंगी।
इससे नौसेना की हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी और युद्धक क्षमता और मजबूत होगी।
सेना और तटरक्षक बल के लिए भी मंजूरी
रक्षा मंत्रालय ने सेना के लिए एंटी-टैंक माइंस ‘विभव’, टी-72 टैंकों और बीएमपी-2 वाहनों के ओवरहॉल तथा अन्य सैन्य उपकरणों की खरीद को भी स्वीकृति दी है।
इससे सेना की ऑपरेशनल तैयारी और उपकरणों की सेवा आयु में बढ़ोतरी होगी।
वहीं भारतीय तटरक्षक बल के लिए डोर्नियर विमानों में इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रा-रेड सिस्टम लगाने की मंजूरी दी गई है, जिससे समुद्री निगरानी और अधिक प्रभावी होगी।
इन सभी प्रस्तावों को ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (AoN) मिली है, जो रक्षा खरीद प्रक्रिया का पहला चरण है। हालांकि अंतिम समझौते से पहले वाणिज्यिक वार्ताएं और कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की मंजूरी जरूरी होगी।
कुल मिलाकर लगभग 3.60 लाख करोड़ रुपये के इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलना भारत की रक्षा तैयारियों को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।
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