MLC चुनाव में नागपुर में कांग्रेस की जीत और वाराणसी में BJP की हार ने सियासी बहस तेज की। जानिए 28 सीटों के नतीजे और भाजपा-कांग्रेस के लिए इनके मायने।
विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने भाजपा और विपक्ष के बीच सियासी बयानबाजी को नया मुद्दा दे दिया है।
एक तरफ भाजपा गठबंधन ने अलग-अलग राज्यों में हुए 28 विधान परिषद सीटों के चुनाव में 16 सीटें जीतकर अपनी स्थिति मजबूत दिखाई, तो दूसरी तरफ नागपुर में कांग्रेस की जीत और वाराणसी में भाजपा की हार ने पार्टी के दावों पर सवाल खड़े किए हैं।
इन नतीजों की चर्चा इसलिए भी हो रही है, क्योंकि मुकाबला उन क्षेत्रों में हुआ जिन्हें भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रभाव वाले इलाके माना जाता है।
महाराष्ट्र की नागपुर स्नातक निर्वाचन सीट पर कांग्रेस के मौजूदा विधान परिषद सदस्य अभिजीत वंजारी ने भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले को 3,271 मतों से हराया। वंजारी को कुल 67,231 वोट मिले, जबकि कोहले के खाते में 63,960 वोट आए।
मतगणना 40 घंटे से अधिक समय तक चली और अंतिम नतीजा वरीयता मतों की गिनती के बाद सामने आया। शुरुआती दौर में भाजपा उम्मीदवार आगे थे, लेकिन बाद के चरणों में तस्वीर बदल गई।
नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय होने के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गृह क्षेत्र भी है। ऐसे में कांग्रेस की जीत को भाजपा के लिए राजनीतिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भी भाजपा को झटका लगा।
यहां विधान परिषद की शिक्षक निर्वाचन सीट पर समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने भाजपा उम्मीदवार को हराकर अपनी सीट बरकरार रखी। वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है, इसलिए इस परिणाम ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया।
हालांकि, विधान परिषद चुनाव के नतीजों को सीधे आम जनता के जनादेश के बराबर नहीं माना जा सकता, क्योंकि इन निर्वाचन क्षेत्रों में केवल निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले और मतदाता सूची में पंजीकृत शिक्षक तथा स्नातक मतदाता वोट डालते हैं।
भाजपा की ओर से विपक्ष की सीमित सीटों को लेकर सवाल उठाए गए, वहीं कांग्रेस ने नागपुर की जीत को अपने पक्ष में अहम उपलब्धि के रूप में पेश किया।
इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस के लिए भी आत्ममंथन का सवाल बना हुआ है, क्योंकि व्यापक चुनावी मुकाबले में उसकी सीटों की संख्या सीमित रही। दूसरी ओर, भाजपा के लिए चुनौती यह समझने की है कि जिन इलाकों में संगठनात्मक पकड़ मजबूत मानी जाती है, वहां मुकाबला इतना करीबी क्यों हुआ।
इन चुनावों में मतदान बैलेट पेपर से हुआ और वरीयता आधारित मतगणना के कारण कुछ सीटों पर परिणाम आने में काफी समय लगा। कुल नतीजे भाजपा गठबंधन को बढ़त दिखाते हैं, लेकिन नागपुर और वाराणसी के परिणाम स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और विपक्ष की मौजूदगी को भी सामने लाते हैं।
अब सवाल यही है कि क्या ये नतीजे आगामी चुनावों की रणनीति पर असर डालेंगे या फिर इनका प्रभाव विधान परिषद की सीमित मतदाता श्रेणियों तक ही रहेगा।
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