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दिलीप गुर्जर मजबूत उम्मीदवार हो सकते हैं पर नागदा के होने के कारण स्थानीय वाला मुद्दा उनकी दावेदारी को कमजोर कर रहा है, जबकि युवा नेता भानुप्रताप पर भी कांग्रेस गंभीरता से विचार कर रही है
भोपाल। मालवा की नीमच मंदसौर संसदीय क्षेत्र को देश का सबसे कीमती क्षेत्र भी कह सकते है। अफीम के इस इलाके में राजनीति भी खूब होती है और जीत भी बहुत बड़ी होती है। कभी लक्ष्मी नारायण पांडे के नाम से विख्यात इस संसदीय क्षेत्र पर कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन ने परचम लहराया तो बाद में जनता ने उन्हें ही लाखों वोटो से धूल भी चटाई।
कांग्रेस इस सीट पर इस बार कुछ नया करेगी तो जीत की सम्भावना बन सकती है। दिलीप गुर्जर मजबूत उम्मीदवार है, पर उनके बाहरी होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। युवा चेहरों को आगे लाने में लगी कांग्रेस यहाँ से भानुप्रताप को टिकट दे सकती है। धार में युवा राधेश्याम मुवेल के टिकट के बाद युवा भानुप्रताप की उम्मीद और बढ़ती दिख रही है।
अभी भाजपा सांसद सुधीर गुप्ता है जो बस पार्टी का चेहरा है /लोकप्रियता को लेकर उनकी स्थिति सन्नाटे जैसी है। कांग्रेस इसी में अवसर ढूंढ रही है। गुर्जर और राजपूत बाहुल्य वाली इस सीट पर नागदा से विधायक दिलीप सिंह गुर्जर का नाम चर्चा में है, वहीं नीमच के युवा और यूथ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह राठौर पर भी सबकी निगाहें टिकी है।
जीतू पटवारी के साथ यूथ कांग्रेस की राजनीति करने वाले भानु प्रताप सिंह के पिता नाथूराम राठौर ठेठ कांग्रेसी है। उन्हें इस क्षेत्र में चुनाव संचालन का अच्छा खासा अनुभव है। कांग्रेस का संशय गुर्जर को लेकर है क्योंकि नीमच विधानसभा में उमा गुर्जर का बुरा हाल हुआ था।
कांग्रेस राजपूत पर दांव खेलती है तो इस क्षेत्र में यह पहली बार होगा जब कांग्रेस किसी राजपूत को चुनावी मैदान में उतारेगी। अब देखना है की जीतू पटवारी गुर्जर पर रिस्क लेंगे या राजपूत भानु पर दांव खेलेंगे। परेशानी यह भी है की दिलीप गुर्जर पर बाहरी का ठप्पा लग सकता है। ऐसे में भानू को स्थानीय राजपूत होने का लाभ मिल जाए,इसकी भी उज्ज्वल संभावनाएं बन रही है।
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