चीन की रणनीति: मुस्लिम देशों के साथ रिश्ते मजबूत करेगा
वैश्विक राजनीति में चीन मुस्लिम देशों के साथ अपने संबंधों को और गहराई देने की दिशा में सक्रिय रूप से नजर आ रहा है। एक ओर जहां अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ और दबाव की राजनीति को लेकर दुनिया के कई देशों से टकराव की स्थिति बनाए हुए हैं, वहीं चीन इस माहौल में खुद को सहयोग और बहु-पक्षीयता के समर्थक के रूप में पेश कर रहा है। इसी कड़ी में चीन ने इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के मंच पर मुस्लिम देशों के साथ एकजुटता दिखाते हुए अमेरिका की नीतियों पर कड़ा हमला बोला है।
OIC के मंच से चीन के विदेश मंत्री वांग यी का बड़ा बयान
सोमवार को हुई अहम बातचीत में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने OIC को इस्लामी दुनिया का सबसे बड़ा अंतर-सरकारी संगठन बताया। उन्होंने कहा कि चीन हमेशा इस्लामी देशों के साथ खड़ा रहा है और आगे भी आपसी सम्मान, समानता और सहयोग के सिद्धांतों पर रिश्ते मजबूत करता रहेगा। वांग यी ने स्पष्ट किया कि वैश्विक मामलों में किसी एक देश का दबदबा या मनमानी स्वीकार्य नहीं हो सकती। उन्होंने OIC देशों से बहुपक्षीय व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।
ट्रंप की नीतियों पर ‘जंगल के कानून’ का आरोप
वांग यी ने डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि इस तरह की नीतियां दुनिया को ‘जंगल के कानून’ की ओर धकेल रही हैं, जहां ताकतवर देश जब चाहे, जैसे चाहे फैसले थोप देता है। उनका कहना था कि टैरिफ युद्ध, एकतरफा प्रतिबंध और दबाव की कूटनीति से वैश्विक स्थिरता को नुकसान पहुंच रहा है। वांग यी के मुताबिक, ऐसी सोच न तो विकास के हित में है और न ही अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए। चीन इस तरह की राजनीति का विरोध करता है और संवाद व सहयोग को ही समाधान मानता है।
वैश्विक संतुलन में चीन की नई भूमिका
चीन का यह रुख केवल अमेरिका की आलोचना तक सीमित नहीं है साथ ही यह उसकी व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। मुस्लिम देशों के साथ नजदीकी बढ़ाकर चीन खुद को वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) की आवाज के रूप में स्थापित करना चाहता है। OIC के साथ सहयोग को मजबूत कर चीन यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह विकासशील और इस्लामी देशों के हितों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने को तैयार है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा के इस दौर में बीजिंग का यह कदम वैश्विक शक्ति संतुलन को नए सिरे से आकार दे रहा है।
कुल मिलाकर, OIC के मंच से चीन का यह बयान न केवल ट्रंप की नीतियों पर प्रहार है बल्कि यह संकेत भी देता है कि आने वाले समय में चीन मुस्लिम देशों के साथ मिलकर बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में और आक्रामक भूमिका निभा सकता है।
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