भोपाल
पेड़ काटने की अनुमति देने के बाद पर्यावरण की भरपाई के लिए जमा करोड़ों रुपये भी नगर निगम ठीक से खर्च नहीं कर पाया। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि पेड़ कटाई के एवज में जमा राशि का उपयोग सही तरीके से नहीं हुआ और रकम पौधारोपण के बजाय दूसरे कामों में खर्च की गई।
इतना ही नहीं, 2021 से राशि का हिस्सा पड़ा हुआ है, जबकि पेड़ काटे जाने के बाद तय मानकों के मुताबिक पौधारोपण तक पूरा नहीं किया गया। ट्रिब्यूनल ने इसे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाली स्थिति माना है। साथ ही भोपाल में हरियाली घटने के आंकड़ों पर भी एनजीटी ने चिंता जताई है।
एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच के आदेश के अनुसार, 2021-22 से 2025-26 के बीच नगर निगम द्वारा 6911 पेड़ काटने की अनुमति दी गई, इनके बदले 24,706 पौधे लगाए जाने थे, लेकिन अब तक 19,152 ही लगाए गए।
पूरी राशि का उपयोग नहीं
वहीं, पेड़ कटाई के एवज में 3.52 करोड़ रुपये जमा हुए, जबकि एक जनवरी 2026 तक सिर्फ 95.85 लाख रुपये ही पौधारोपण और संबंधित कार्यों पर खर्च किए गए। यानी करीब 2.56-2.57 करोड़ रुपये का उपयोग ही नहीं किया गया।
एनजीटी ने माना कि राशि का उचित उपयोग नहीं हुआ और पौधारोपण भी तय मानकों के मुताबिक नहीं किया गया। एनजीटी ने साफ कहा कि पेड़ काटने से हुए नुकसान की भरपाई के लिए पौधारोपण उसी वित्तीय वर्ष या अगले मानसून में किया जाना चाहिए था, लेकिन नगर निगम की लापरवाही के कारण ऐसा नहीं हुआ।
समिति बनाने और योजना तैयार करने में लगा रहा निगम
एनजीटी ने नगर निगम के रिकार्ड की जांच के बाद कहा कि जमा राशि का उचित उपयोग नहीं हुआ और रकम का कुछ हिस्सा दूसरे कामों में खर्च किया गया।
नगर निगम की सुस्ती का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जिस पौधारोपण का काम मानसून में पूरा होना चाहिए था, उसके लिए निगम बाद में समिति बनाने और योजना तैयार करने में लगा रहा। एनजीटी ने इस स्थिति को ‘आश्चर्यजनक और चौंकाने वाला’ बताया।
आदेश में पिछले एक दशक में शहर में चार से पांच लाख परिपक्व पेड़ काटे जाने के अनुमान और आइआइएससी के आकलन का उल्लेख है, जिसके अनुसार व्यापक भोपाल शहरी क्षेत्र में ट्री कैनोपी में 44 प्रतिशत कमी आई है।
निगम को एक महीने में पूरा करना होगा पौधारोपण
एनजीटी ने नगर निगम को एक महीने में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार क्षतिपूर्ति पौधारोपण पूरा करने के निर्देश दिए हैं। पौधारोपण अतिरिक्त और निर्धारित खुले क्षेत्र में किया जाएगा, ताकि हरित क्षेत्र का वास्तविक नुकसान पूरा हो सके। इसके लिए पानी की पर्याप्त व्यवस्था भी करनी होगी।
पेड़ कटाई के एवज में जमा राशि का उपयोग सिर्फ पौधारोपण, रखरखाव और पौधों के सर्वाइवल के लिए किया जाए। पुराने पौधारोपण के बीच खाली जगह भरने को क्षतिपूर्ति पौधारोपण नहीं माना जाएगा। निगम को लगाए गए पौधों के सर्वाइवल की जांच कर फोटो सहित रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी।
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