Sanjay Singh House Arrest

Sanjay Singh House Arrest

श्रीनगर में आम आदमी पार्टी सांसद नजरबंद: गेट पर लटके संजय सिंह और बाहर खड़े रह गए फारूक अब्दुल्ला

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Sanjay Singh House Arrest: जम्मू-कश्मीर की राजनीति इस समय सियासी तूफान से गरमाई हुई है।

आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक मेहराज मलिक की गिरफ्तारी और उसके विरोध में उठे स्वर तेज हो गए हैं।

दिल्ली से राज्यसभा सांसद गुरुवार को श्रीनगर पहुंचे थे, ताकि वह मलिक की गिरफ्तारी के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस और धरना कर सकें।

लेकिन यहां पहुंचते ही पुलिस ने संजय सिंह को सरकारी गेस्ट हाउस में नजरबंद कर दिया।

आप सांसद का आरोप है कि गेस्ट हाउस को पुलिस छावनी में तब्दील कर उन्हें मीडिया से बात करने तक की अनुमति नहीं दी।

फारूक अब्दुल्ला को मिलने नहीं दिया

पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला को जैसे ही पता चला कि संजय सिंह को नजरबंद किया गया है।

वह उनसे मिलने सरकारी गेस्ट हाउस पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें भी अंदर जाने से रोक दिया।

इसके बाद दोनों नेताओं की मुलाकात गेस्ट हाउस के गेट पर ही हुई।

संजय सिंह ने इसे “तानाशाही का आलम” बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन और प्रेस कॉन्फ्रेंस करना कोई अपराध नहीं है।

मेहराज मलिक की गिरफ्तारी का मामला

डोडा से AAP विधायक मेहराज मलिक को 8 सितंबर को पब्लिक सिक्योरिटी एक्ट (PSA) के तहत गिरफ्तार किया गया था।

प्रशासन का कहना है कि उन पर सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कठुआ जिला जेल में बंद कर दिया गया।

AAP का आरोप है कि यह गिरफ्तारी पूरी तरह राजनीतिक है और मलिक को उनके निर्वाचन क्षेत्र में जनता की आवाज उठाने के कारण निशाना बनाया गया।

संजय सिंह ने कहा, मेहराज मलिक पर गलत तरीके से PSA लगाया गया है। यह गिरफ्तारी जनता की आवाज दबाने और विपक्ष को डराने की कोशिश है।

मलिक की गिरफ्तारी से डोडा में 4 दिनों से तनाव

मलिक की गिरफ्तारी के विरोध में डोडा और आसपास के इलाकों में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। समर्थक और कार्यकर्ता चार दिनों से सड़कों पर हैं।

हालात बिगड़ने पर प्रशासन ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163 लागू कर दी है, जिसके तहत बिना अनुमति भीड़ जुटाने और लोगों की आवाजाही पर रोक है।

9 सितंबर को समर्थकों ने डोडा चलो’ मार्च निकाला। इस दौरान पुलिस से उनकी झड़प हुई और पत्थरबाजी भी हुई। सुरक्षाबलों को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।

10 सितंबर को भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसके बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए।

इसके बाद से डोडा, भद्रवाह, गंडोह और थाथरी जैसे इलाकों में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती है। हालांकि इसके बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।

प्रदर्शनकारियों के आक्रामक रुख को देखते हुए पुलिस ने अब तक 80 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है। इस विवाद के बीच एक और घटनाक्रम ने चर्चा बटोरी।

जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक कार्यकर्ता फातिमा फारूक डोडा में हालात और मेहराज मलिक की गिरफ्तारी पर लाइव स्ट्रीमिंग कर रही थीं।

तभी उनके पति ने इसका विरोध किया और कैमरे के सामने ही उनसे बदसलूकी की। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

बाद में पुलिस ने फातिमा को सरकारी आदेश का उल्लंघन करने और उनके पति को बदसलूकी के आरोप में गिरफ्तार किया।

संजय सिंह का आरोप, तानाशाही चरम पर

संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, आज मेहराज मलिक की अवैध गिरफ्तारी के खिलाफ श्रीनगर में प्रेस कॉन्फ्रेंस और धरना था।

लेकिन सरकारी गेस्ट हाउस को पुलिस छावनी बना दिया गया है। मुझे और मेरे साथियों को बाहर निकलने तक नहीं दिया जा रहा है।

लोकतंत्र में अधिकारों के लिए आवाज उठाना हमारा संवैधानिक अधिकार है। यह तानाशाही नहीं तो और क्या है?

उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन उन्हें यह बताने को तैयार नहीं है कि आखिर उन्हें क्यों रोका गया है।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया।

उन्होंने पोस्ट कर लिखा- यह लोकतंत्र नहीं बल्कि सरासर गुंडागर्दी और तानाशाही है।

पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, जो मौजूदा मुख्यमंत्री के पिता हैं, उन्हें भी संजय सिंह से मिलने नहीं दिया गया।

इस पूरे विवाद ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर केंद्र-राज्य संबंधों और लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विपक्षी दलों का कहना है कि यहां असहमति की आवाजों को दबाया जा रहा है।

वहीं प्रशासन का दावा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी स्थिति में हिंसा फैलने नहीं दी जाएगी।

 

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