मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव 2027 से पहले पंचायतों को टैक्स लगाने का अधिकार देने की तैयारी है। ग्राम सभा के अधिकारों में बदलाव का प्रस्ताव भी चर्चा में है।
भोपाल। मध्य प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले पंचायत राज व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी की जा रही है। डॉ. मोहन यादव सरकार पंचायतों को नगरपालिका की तर्ज पर टैक्स लगाने का अधिकार देने की दिशा में काम कर रही है।
इसके साथ ही ग्राम सभा के अधिकारों को पंचायत समितियों को सौंपने का प्रस्ताव भी सामने आया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने बालाघाट जिले के वारासिवनी जनपद की ग्राम पंचायत गर्रा में आयोजित सरपंच सम्मेलन के दौरान इन प्रस्तावित बदलावों की जानकारी दी। हालांकि, नई व्यवस्था के सभी नियम और प्रावधान अभी स्पष्ट नहीं हुए हैं।
सरकार की योजना पंचायत चुनाव से पहले पंचायत राज नियमों में संशोधन करने की है। मंत्री के अनुसार, नियमों में बदलाव की प्रक्रिया चल रही है और इसके लिए करीब एक महीने में अधिसूचना जारी करने की तैयारी है।
सरकार नवंबर 2026 तक नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में काम कर रही है। यदि प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं, तो ग्रामीण स्थानीय शासन की कार्यप्रणाली और पंचायतों के अधिकारों में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
पंचायतों को टैक्स लगाने का अधिकार देने का प्रस्ताव इस बदलाव का प्रमुख हिस्सा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पंचायतें किन सेवाओं, संपत्तियों या अन्य मदों पर कर लगा सकेंगी।
टैक्स की दरें कौन तय करेगा और वसूली की प्रक्रिया क्या होगी, इन सवालों पर भी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पंचायतों के पास स्थानीय विकास कार्यों के लिए अपने संसाधन बढ़ाने का विकल्प उपलब्ध कराना हो सकता है, लेकिन इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन नियम जारी होने के बाद ही किया जा सकेगा।
ग्राम सभा के अधिकारों में बदलाव का प्रस्ताव भी चर्चा का अहम विषय है। ग्राम सभा गांव के विकास, सरकारी योजनाओं और स्थानीय जरूरतों पर चर्चा करने के लिए महत्वपूर्ण मंच मानी जाती है।
मंत्री प्रहलाद पटेल के मुताबिक, ग्राम सभा की अनिवार्यता बनी रहेगी, लेकिन उसके अधिकार पंचायत समितियों को सौंपने की तैयारी है। ऐसे में नई व्यवस्था लागू होने पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ग्राम सभा की भूमिका, निर्णय प्रक्रिया और ग्रामीणों की भागीदारी किस तरह निर्धारित की जाती है।
पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर मंत्री ने कहा कि चुनाव पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने से एक या दो महीने पहले कराने की योजना है, ताकि नई पंचायतों को समय पर जिम्मेदारी सौंपी जा सके।
मध्य प्रदेश में पिछला त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव जून-जुलाई 2022 में हुआ था। आगामी चुनाव के लिए मतदाता सूची एक जनवरी 2027 की स्थिति के आधार पर तैयार किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, अप्रैल-मई 2027 में चुनाव कराने की तारीख अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुई है।
इस बीच ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को लेकर भी सरकार ने निर्माण कार्यों की जानकारी दी है।
मंत्री के अनुसार, प्रदेश में 2,472 पंचायत भवन तैयार हो चुके हैं, जिनका लोकार्पण 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर किया जाना प्रस्तावित है। प्रत्येक भवन के लिए 37.50 लाख रुपये दिए गए हैं। इसके अलावा, विभाग ने 3,700 से अधिक सामुदायिक भवनों के निर्माण की जानकारी भी दी है।
अब पंचायत चुनाव से पहले प्रस्तावित नियम संशोधनों पर नजर रहेगी। टैक्स लगाने की व्यवस्था और ग्राम सभा के अधिकारों में बदलाव से जुड़े अंतिम प्रावधान अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
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