भोपाल
एमपी, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के शहरों से निकलने वाले सीवेज के उपचार के लिए पर्याप्त क्षमता नहीं है। इसके अलावा कई घर अब भी सीवेज नेटवर्क से नहीं जुड़े हैं। इस पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने तीनों राज्यों से सीवेज को नदियों, तालाबों और झीलों में पहुंचने से रोकने और उसके उपचार की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
अधिकरण ने स्पष्ट किया कि बिना उपचारित सीवेज को जलस्रोतों या खुले स्थानों में छोड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। राज्यों को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण से लेकर उनके पूरी क्षमता से संचालन और उपचारित पानी के दोबारा उपयोग तक की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
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