गन्ना किसानों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार का बड़ा कदम: 1 हफ्ते में उच्चस्तरीय कमेटी बनाने का ऐलान
मोदी सरकार की प्राथमिकता में अन्नदाता: गन्ना रिकवरी में हेराफेरी और समस्याओं पर कड़ा रुख, शिवराज सिंह चौहान ने दिए ठोस व्यवस्था के निर्देश
नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में केंद्र सरकार किसानों के सर्वांगीण कल्याण, उनकी उपज के पारदर्शी मूल्यांकन और आय सुरक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में कर्नाटक और महाराष्ट्र से आए गन्ना किसानों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील उच्चस्तरीय बैठक की।
इस बैठक में कर्नाटक सरकार के संबंधित मंत्रीगण तथा केंद्र व राज्य सरकारों के सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में गन्ना किसानों की जमीनी समस्याओं, शुगर मिलों द्वारा रिकवरी के आंकड़ों में अंतर, वजन, वेस्टेज, प्रयोगशाला जांच और फसल बीमा से जुड़े विभिन्न विषयों पर बिंदुवार व विस्तार से सार्थक चर्चा हुई।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ किसानों की बात को बेहद गंभीरता और आत्मीयता से सुनते हुए स्पष्ट किया कि मोदी सरकार के लिए किसानों की सेवा ही भगवान की पूजा के समान है। अन्नदाता का शोषण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसानों द्वारा रखे गए रिकवरी डिफरेंस, वजन में कटौती और मिलों द्वारा वास्तविक रिकवरी छिपाने जैसी विसंगतियों को उन्होंने बेहद संवेदनशील विषय बताया। चौहान ने कहा कि इन विसंगतियों का कोई भी तात्कालिक या आधा-अधूरा समाधान निकालने के बजाय एक पारदर्शी और वैज्ञानिक प्रणाली स्थापित करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में कोई भी मिल किसानों के हक पर डाका न डाल सके।
किसानों को तत्काल और प्रभावी राहत देने के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्री चौहान ने प्रह्लाद जोशी के साथ बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि एक सप्ताह के भीतर एक विशेष उच्चस्तरीय संयुक्त कमेटी का गठन किया जाएगा। इस कमेटी में केंद्र सरकार, संबंधित राज्य सरकारों (कर्नाटक व महाराष्ट्र), किसान संगठनों के अधिकृत प्रतिनिधि, शुगर मिलों के प्रतिनिधि और विषय विशेषज्ञ वैज्ञानिकों को शामिल किया जाएगा। यह कमेटी गन्ने की कटाई के समय, रिकवरी के साइंटिफिक मापदंड, आधुनिक लैब टेस्टिंग व्यवस्था और वजन की शुद्धता से जुड़े हर तकनीकी पहलू की बारीकी से जांच करेगी और एक निश्चित समय-सीमा में अपनी व्यावहारिक सिफारिशें सरकार को सौंपेगी। इस संबंध में राज्य सरकार से भी सहयोग की अपेक्षा की गई है, ताकि किसानों की भलाई के लिए और तेजी से कार्यवाही की जा सकें।
शिवराज सिंह द्वारा प्रह्लाद जोशी के साथ आयोजित इस बैठक में यह भी तय किया गया कि समस्याओं के समाधान को दो चरणों- अल्पकालिक (शॉर्ट टर्म) और दीर्घकालिक (लॉन्ग टर्म) में विभाजित कर नीतिगत फैसले लिए जाएंगे। तात्कालिक प्रशासनिक सुधारों को लागू करने के साथ ही नीतिगत व तकनीकी व्यवस्थाओं को वैज्ञानिक आधार पर स्थायी रूप से सुदृढ़ किया जाएगा।
किसानों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को सर्वोपरि रखते हुए शिवराज सिंह चौहान ने पूरी बैठक में स्वयं उपस्थित रहकर संवाद को निष्कर्ष तक पहुंचाया। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार बिना किसी भेदभाव के पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके सुझावों पर अमल करेगी और मोदी सरकार किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए हरसंभव सहयोग, सहायता और ठोस व्यवस्था निरंतर जारी रखेगी।
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी बैठक में गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) निर्धारण की वैज्ञानिक प्रक्रिया और लागत आकलन के तौर-तरीकों की जानकारी देते हुए आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार राज्यों और किसानों के समन्वय से हर स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित कर रही है।
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