TMC Crisis

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TMC का नाम-चिह्न फ्रीज, ममता ने EC को दिए 3 विकल्प

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पश्चिम बंगाल उपचुनाव से पहले EC ने TMC का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज किया। ममता गुट ने तीन नाम-चिह्न के विकल्प दिए, राहुल गांधी ने आयोग पर सवाल उठाए।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा विवाद अब पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न तक पहुंच गया है।

चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के पारंपरिक ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया है। आयोग के इस फैसले के बाद ममता बनर्जी ने कड़ा विरोध जताया है, जबकि दूसरे गुट ने इसे स्वीकार किया है।

चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को उपचुनाव के लिए तीन-तीन वैकल्पिक पार्टी नाम और आयोग की ओर से उपलब्ध कराए गए फ्री चुनाव चिह्नों में से तीन-तीन विकल्प देने को कहा था। आयोग के निर्देश के मुताबिक दोनों गुट अपने नए नाम में मूल पार्टी से संबंध का उल्लेख करना चाहें तो कर सकते हैं। यह व्यवस्था फिलहाल आगामी उपचुनावों के लिए है और पार्टी के नाम तथा स्थायी चुनाव चिह्न पर अंतिम फैसला बाद में किया जाएगा।

ममता बनर्जी की ओर से गुरुवार देर रात चुनाव आयोग को जवाब भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, उनके गुट ने आयोग के सामने तीन पसंदीदा नाम और तीन चुनाव चिह्न के विकल्प रखे हैं।

आयोग की कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब तृणमूल कांग्रेस के दोनों पक्ष पार्टी पर अधिकार और संगठन की पहचान को लेकर आमने-सामने हैं।

यह विवाद 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद सामने आए पार्टी के अंदरूनी मतभेदों से जुड़ा है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट और ऋतब्रत बनर्जी से जुड़े विरोधी गुट ने चुनाव आयोग के सामने पार्टी के नाम और चिह्न पर अपना-अपना दावा रखा था।

आयोग ने दोनों पक्षों को अपनी दलीलें और दस्तावेज पेश करने के अवसर दिए। इसके बाद उसने फिलहाल दोनों को मूल नाम और चिह्न से अलग रखने का अंतरिम फैसला किया।

दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत किया है।

उनका पक्ष है कि आयोग ने दोनों गुटों को समान स्थिति में रखने के लिए यह कदम उठाया है। अब दोनों पक्षों को आगामी उपचुनाव अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ लड़ना होगा, जब तक आयोग इस विवाद पर अंतिम निर्णय नहीं लेता।

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि पार्टी विभाजन तथा चुनाव चिह्न से जुड़े मामलों में आयोग का रवैया विपक्षी दलों के खिलाफ रहा है। राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में टीएमसी के मौजूदा विवाद को शिवसेना और एनसीपी से जुड़े पुराने घटनाक्रमों से भी जोड़ा। उनके बयान पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

चुनाव आयोग का यह अंतरिम आदेश पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनावों की तैयारियों के बीच आया है। नंदीग्राम और रेजीनगर समेत संबंधित सीटों पर होने वाले चुनावों में अब दोनों गुटों की अलग-अलग चुनावी पहचान होगी। पार्टी के मूल नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम फैसला आयोग की आगे की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा

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