मोदी सरकार की जन-धन, UPI, स्वनिधि, पीएम किसान, उज्ज्वला और आवास जैसी प्रमुख योजनाओं, उपलब्धियों और आलोचनाओं की पूरी जानकारी।
पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने पिछले वर्षों में आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी क्षेत्र में कई बड़ी योजनाएं और नीतिगत पहल शुरू की हैं। इनका उद्देश्य बैंकिंग सुविधाओं को आम लोगों तक पहुंचाने,
डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने, गरीबों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने और रोजगार व उत्पादन के अवसर बढ़ाने पर रहा है। इन योजनाओं के प्रभाव को लेकर अलग-अलग पक्षों की अपनी-अपनी राय रही है।
वित्तीय समावेशन की दिशा में प्रधानमंत्री जन-धन योजना को एक प्रमुख पहल माना जाता है। इसके जरिए बड़ी संख्या में लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया। आधार, मोबाइल और बैंक खातों के मेल से तैयार JAM व्यवस्था ने सरकार की ओर से मिलने वाली कई तरह की सहायता को सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने का रास्ता तैयार किया। इसी के साथ डिजिटल इंडिया अभियान और UPI ने देश में डिजिटल भुगतान को तेजी से बढ़ाया और रोजमर्रा के लेनदेन के तरीके में बड़ा बदलाव आया।
कोरोना महामारी के बाद छोटे कारोबारियों और रेहड़ी-पटरी वालों की मदद के लिए पीएम स्वनिधि योजना शुरू की गई। योजना के तहत बिना गारंटी छोटे ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई गई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2026 तक 92 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को ऋण दिया जा चुका था और कुल वितरित राशि ₹17,115 करोड़ से अधिक रही।
ग्रामीण और सामाजिक क्षेत्र में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, पीएम आवास योजना और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ ईंधन, घर और पेयजल जैसी जरूरतों पर ध्यान दिया गया।
किसानों के लिए पीएम किसान सम्मान निधि के जरिए पात्र किसानों को सीधे आर्थिक सहायता दी जाती है। इसके अलावा प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को 2025-26 के केंद्रीय बजट में 100 कम उत्पादकता वाले जिलों के विकास के लिए प्रस्तावित किया गया।
इसका उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने, सिंचाई और भंडारण सुविधाओं में सुधार तथा किसानों की आय से जुड़े अवसरों को मजबूत करना है।
युवाओं और रोजगार के क्षेत्र में भी कई योजनाएं सामने आईं। 2024 में शुरू पीएम इंटर्नशिप योजना का उद्देश्य युवाओं को कंपनियों में व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराना है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना छोटे कारोबार और स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध कराती है।
वहीं आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घरेलू उत्पादन और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए, जिनमें उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन यानी PLI योजनाएं भी शामिल हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर सड़क, रेलवे, बंदरगाह और हवाई अड्डों जैसी सुविधाओं के विस्तार के लिए निवेश बढ़ाया गया। विदेश नीति में ‘नेबरहुड फर्स्ट’ के साथ वैश्विक मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी भी मोदी सरकार की प्रमुख नीतिगत प्राथमिकताओं में रही है।
हालांकि इन योजनाओं और नीतियों के प्रभाव को लेकर राजनीतिक और आर्थिक विश्लेषकों में अलग-अलग मत हैं। समर्थक इन्हें विकास, डिजिटल पहुंच और कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार से जोड़ते हैं, जबकि आलोचक इनके क्रियान्वयन, रोजगार, कृषि संकट, महंगाई और नोटबंदी व GST जैसे फैसलों के प्रभाव पर सवाल उठाते रहे हैं।
इसलिए इन पहलों का आकलन करते समय सरकारी आंकड़ों के साथ स्वतंत्र अध्ययनों और विभिन्न दृष्टिकोणों को देखना जरूरी है।
