बच्चों से जुड़े यौन शोषण वाले कंटेंट पर भारत सरकार सख्त, मेटा अब ऐसे मामलों की जानकारी भारतीय पुलिस और जांच एजेंसियों को देगा।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भारत सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों के बीच सख्ती बढ़ती दिखाई दे रही है। इसी कड़ी में मेटा ने भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों से जुड़ी एक अहम मांग को स्वीकार किया है।
कंपनी अब अपने प्लेटफॉर्म पर सामने आने वाले बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट और मामलों की जानकारी भारतीय पुलिस तथा संबंधित जांच एजेंसियों तक सीधे पहुंचाने की व्यवस्था पर काम करेगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार की प्राथमिकता केवल आपत्तिजनक सामग्री हटाने तक सीमित नहीं है। वह चाहती है कि बच्चों के शोषण से जुड़े मामलों की जानकारी समय रहते भारतीय एजेंसियों तक पहुंचे,
ताकि जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई की जा सके। मेटा की ओर से इस दिशा में सहमति को ऑनलाइन बाल सुरक्षा से जुड़े प्रयासों में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह मामला तब ज्यादा चर्चा में आया जब इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट को बढ़ावा देने वाले पेड विज्ञापनों की जानकारी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ विज्ञापनों के जरिए यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों तक पहुंचाया जा रहा था,
जहां कथित तौर पर आपत्तिजनक सामग्री उपलब्ध थी। इसके बाद सरकार ने मेटा से इस मामले में जवाब और कार्रवाई की मांग तेज कर दी।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग यानी एनसीपीसीआर ने भी मामले का संज्ञान लिया। 9 सितंबर को मेटा इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों को आयोग के समक्ष पेश होना पड़ा।
आयोग की ओर से इंस्टाग्राम पर दिखाई दे रहे ऐसे विज्ञापनों और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सवालों पर कंपनी से जानकारी मांगी गई। इससे पहले जुलाई में भी सरकार ने मेटा को आपत्तिजनक सामग्री हटाने और मामले पर विस्तृत जवाब देने के निर्देश दिए थे।
मेटा का कहना है कि कंपनी को जब बच्चों के शोषण से जुड़ी सामग्री की जानकारी मिलती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। कंपनी ऐसे मामलों की रिपोर्ट नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रेन यानी एनसीएमईसी को भी करती है।
भारत में पोक्सो कानून से संबंधित प्रावधानों के तहत जानकारी साझा करने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है।
कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, भारत में पिछले छह महीनों के दौरान सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले 1.6 लाख से ज्यादा अकाउंट्स पर कार्रवाई की गई है। हालांकि सरकार का जोर अब कार्रवाई के साथ-साथ जानकारी साझा करने की प्रक्रिया को भी तेज करने पर है।
मेटा की यह सहमति ऐसे समय में सामने आई है जब सरकार अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ भी बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर बातचीत कर रही है। उद्देश्य यह है कि बच्चों से जुड़े यौन शोषण वाले कंटेंट की पहचान, रिपोर्टिंग और रोकथाम की प्रक्रिया ज्यादा प्रभावी बनाई जा सके।
आने वाले समय में इस संबंध में अन्य प्लेटफॉर्म से भी अतिरिक्त कदम उठाने की अपेक्षा की जा रही है।
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