Saharanpur Mosque

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सहारनपुर मस्जिद विवाद: कार्रवाई पर आमने-सामने सरकार-विपक्ष

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सहारनपुर मस्जिद विवाद: कार्रवाई पर आमने-सामने सरकार-विपक्ष

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित एक मस्जिद को हटाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। प्रशासन ने यह कार्रवाई उस समय की, जब जिला अदालत मस्जिद से जुड़े मामले में पहले जारी आदेश को बरकरार रख चुकी थी। सरकार इसे न्यायिक प्रक्रिया के तहत उठाया गया कदम बता रही है, वहीं विपक्ष का आरोप है कि प्रशासन ने अदालत के आदेश की सीमा से आगे जाकर कार्रवाई की।

मामले में जमीन के स्वामित्व और मस्जिद के निर्माण को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। शिकायतकर्ता विकास त्यागी ने आरोप लगाया था कि सरकारी जमीन पर मस्जिद का निर्माण अनधिकृत रूप से किया गया है। उन्होंने परिसर में कथित व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए थे।

सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने 16 जुलाई को पब्लिक प्रेमिसेज एक्ट के तहत मस्जिद को अवैध संरचना मानते हुए उसे हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही सरकारी भूमि पर कथित कब्जे के लिए करीब 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।

मस्जिद समिति ने इस फैसले के खिलाफ अपील करते हुए दावा किया था कि यह ढांचा आजादी से काफी पहले का है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की ओर से मस्जिद के वर्ष 1911 से मौजूद होने का दावा भी किया गया। उनके मुताबिक राजस्व दस्तावेजों में जमीन से जुड़े नाम भी दर्ज हैं।

सहारनपुर जिला अदालत में मामले पर 17 बार सुनवाई हुई। 2 सितंबर को अदालत ने मस्जिद समिति की अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले को कायम रखा। अदालत के मुताबिक संबंधित जमीन सरकारी है और वहां मौजूद निर्माण को अवैध माना गया।

हालांकि, यहीं से विवाद का दूसरा पहलू सामने आया। मस्जिद पक्ष का कहना है कि मूल आदेश में परिसर खाली करने का निर्देश था, लेकिन धार्मिक ढांचे को तोड़ने की स्पष्ट अनुमति नहीं दी गई थी। अब इसी बिंदु को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी की जा रही है।

जिला अदालत के फैसले के बाद प्रशासन ने 4 सितंबर की रात मस्जिद को सील कर दिया। इसके दो दिन बाद सुबह तड़के ढांचे को हटाने की कार्रवाई शुरू हुई। प्रशासन ने इसके लिए छह बुलडोजर और अन्य भारी मशीनरी लगाई। कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट के पांचों प्रवेश द्वार बंद रहे।

सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद कड़ी थी। दस से अधिक पुलिस थानों के जवानों के अलावा प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी और रैपिड एक्शन फोर्स को तैनात किया गया। वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। पुलिस अधिकारियों ने दावा किया कि पूरी कार्रवाई न्यायालय से मिले आदेश के अनुरूप की गई।

विपक्ष ने उठाए कानूनी और राजनीतिक सवाल

मस्जिद गिराए जाने के बाद कांग्रेस, सपा, बसपा और आम आदमी पार्टी समेत कई विपक्षी दल सरकार पर हमलावर हैं। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कार्रवाई को लेकर कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए और हाईकोर्ट जाने की बात कही।

सपा सांसद इकरा हसन ने भी प्रशासन की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों के संदर्भ में Places of Worship Act का उल्लेख किया। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए धार्मिक सद्भाव का मुद्दा उठाया।

बसपा प्रमुख मायावती ने सरकार से ऐसी कार्रवाई में जल्दबाजी से बचने और संवैधानिक रास्ता अपनाने की अपील की। वहीं AAP नेता संजय सिंह ने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे राजनीतिक मकसद हो सकता है। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भी भाजपा पर धर्म के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया।

दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि मस्जिद को धार्मिक पहचान के कारण नहीं, बल्कि सरकारी जमीन पर कथित अवैध निर्माण के मामले में हटाया गया है। राज्य सरकार का तर्क है कि प्रशासन ने अदालत के फैसले के बाद ही आगे की कार्रवाई की।

इकरा हसन को रोकने का आरोप

मामले में सांसद इकरा हसन को सहारनपुर जाने से कथित तौर पर रोके जाने ने विवाद को और हवा दे दी। इकरा हसन ने दावा किया कि उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया और उन्हें घटनास्थल तक पहुंचने की अनुमति नहीं दी गई।

सपा ने इसे निर्वाचित सांसद के काम में हस्तक्षेप बताया। पार्टी का कहना है कि जनप्रतिनिधि को अपने क्षेत्र में जाकर स्थिति का जायजा लेने से रोकना लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल खड़ा करता है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सहारनपुर की मस्जिद का मामला अब स्थानीय जमीन विवाद से आगे निकलकर प्रदेश की राजनीति का मुद्दा बन गया है। एक तरफ सरकार अदालत के आदेश और प्रशासनिक प्रक्रिया को आधार बना रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष कार्रवाई के तरीके, धार्मिक अधिकारों और पुलिस बंदोबस्त को लेकर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में हाईकोर्ट की संभावित सुनवाई इस विवाद की कानूनी दिशा तय करने में अहम हो सकती है

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