मायावती की युवाओं को दो टूक, कहा- अपने मुद्दों की लड़ाई खुद लड़ें, राजनीतिक दलों से रहें सावधान
बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने देश में चल रहे छात्र और युवा आंदोलनों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों पर निशाना साधा है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे राजनीतिक दलों के प्रभाव में आने के बजाय अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर खुद आवाज उठाएं।
मायावती ने कहा कि युवाओं के आंदोलनों को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं होने देना चाहिए।
मंगलवार को लखनऊ स्थित बसपा कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान मायावती ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में छात्र और युवा अपनी समस्याओं को लेकर परेशान हैं।
उनके मुताबिक बेरोजगारी, रोजगार, शिक्षा और दूसरे मुद्दों को लेकर युवाओं में नाराजगी है, लेकिन इन समस्याओं पर संसद में जिस गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए, वह दिखाई नहीं दे रही है।
मायावती ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान का असर आम लोगों के मुद्दों पर पड़ रहा है। उनका दावा है कि छात्रों और नौजवानों से जुड़े कई आंदोलनों को राजनीतिक दल अपने-अपने हित के हिसाब से इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं।
ऐसे में युवाओं को यह समझने की जरूरत है कि उनकी आवाज किसी दूसरे राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा न बन जाए।
उन्होंने खास तौर पर झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन का जिक्र किया। मायावती के मुताबिक वहां छात्रों की समस्याओं को लेकर जिस तरह की राजनीतिक गतिविधियां हो रही हैं, उससे आंदोलन का मूल मुद्दा पीछे छूटने का खतरा है।
उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर भी सवाल उठाए और भाजपा पर आंदोलन को अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
बसपा प्रमुख ने आगे युवाओं से कहा कि उन्हें किसी भी राजनीतिक दल के बहकावे में आने के बजाय अपने मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर छात्र और युवा अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं तो उनकी समस्याओं का समाधान होना जरूरी है, न कि उनके आंदोलन को राजनीतिक खेमेबाजी में बदल दिया जाए।
मायावती ने इस दौरान अपनी सरकार के कार्यकाल का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार के दौरान छात्रों और युवाओं से जुड़े कई मामलों पर काम किया गया था। उनका दावा है कि उस समय सरकारी विभागों में लंबे समय से अटके कामों को आगे बढ़ाया गया और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की कोशिश की गई।
सरकारी नौकरियों का जिक्र करते हुए मायावती ने कहा कि उनके शासनकाल में पुलिस विभाग समेत कई क्षेत्रों में पद सृजित किए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा दौर में सार्वजनिक क्षेत्र को कमजोर किया जा रहा है और निजी क्षेत्र को ज्यादा बढ़ावा दिया जा रहा है।
उनके मुताबिक इसका फायदा मुख्य रूप से बड़े पूंजीपति और आर्थिक रूप से मजबूत वर्ग को मिल रहा है।
मायावती ने निजी क्षेत्र में आरक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने साफ किया कि बसपा निजी क्षेत्र के खिलाफ नहीं है, लेकिन उनका मानना है कि वहां भी समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों को प्रतिनिधित्व और आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।
यह मांग बसपा की सामाजिक न्याय की राजनीति का एक अहम हिस्सा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कमजोर और वंचित वर्गों को पीछे रखने की कोशिशें लगातार हो रही हैं। मायावती ने उत्तर प्रदेश की जनता से सतर्क रहने और अपने राजनीतिक हितों को समझकर फैसला लेने की अपील की।
आने वाले चुनावों को लेकर भी बसपा प्रमुख ने अपनी रणनीति का संकेत दिया। उन्होंने दलित, पिछड़े, आदिवासी, किसान, मजदूर और दूसरे सामाजिक समूहों से बसपा को मजबूत करने की अपील की।
मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की बात करती है और इसी आधार पर आगे की राजनीतिक दिशा तय करेगी।
मायावती ने भाजपा और कांग्रेस दोनों पर जातीय राजनीति करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि बसपा की राजनीति का आधार किसी एक वर्ग के बजाय समाज के सभी हिस्सों के हितों को आगे बढ़ाना है। उन्होंने ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति का जिक्र करते हुए कहा कि समाज के कमजोर वर्गों को सम्मान और बेहतर अवसर दिलाना उनकी पार्टी की प्राथमिकता है।
इस पूरे बयान के जरिए मायावती ने एक तरफ युवाओं को राजनीतिक दलों से दूरी बनाकर अपने मुद्दों पर संघर्ष करने का संदेश दिया है, वहीं दूसरी ओर बसपा को छात्रों, नौजवानों और वंचित वर्गों के लिए एक राजनीतिक विकल्प के तौर पर पेश करने की कोशिश की है।
ऐसे समय में जब छात्र आंदोलनों और रोजगार से जुड़े मुद्दे लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं, मायावती का यह बयान यूपी की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे सकता है।
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