अमेरिका के इस बिल से भारत पर लग सकता है 100% Tariff!

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रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका में लाए गए एक नए विधेयक ने भारत में राजनीतिक बहस तेज कर दी है। अमेरिकी सीनेट ने ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ को 86-11 के भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है।

इस बिल में रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदार देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, इसे लागू करने से पहले अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की मंजूरी जरूरी होगी।

इस बिल को लेकर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र की विदेश नीति को लेकर सवाल उठाए। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ भारत के संबंधों को संभालने में सरकार की रणनीति देश के हितों के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है।

केजरीवाल ने अपनी पोस्ट में सरकार पर हमला करते हुए कहा कि देश को अमेरिका के हाथों गिरवी रखने और ट्रंप की हर बात मानने का खामियाजा अब भारत को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि भारत के छोटे-बड़े फैसलों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रभाव बढ़ गया है और अमेरिका लगातार भारत के खिलाफ फैसले ले रहा है।

अमेरिकी सीनेट ने क्या बिल पास किया?

अमेरिकी सीनेट ने रूस और उसके प्रमुख ऊर्जा खरीदार देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने वाले विधेयक को 86 के मुकाबले 11 वोटों से पारित किया। इस प्रस्ताव का उद्देश्य रूस की ऊर्जा से होने वाली आय को सीमित करना है, क्योंकि अमेरिका और बिल के समर्थकों का तर्क है कि रूस की ऊर्जा कमाई से उसे यूक्रेन युद्ध के लिए आर्थिक संसाधन मिलते हैं।

बिल में अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है। इसमें भारत और चीन समेत पांच देशों को निशाना बनाया गया है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत पर तुरंत 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है। इसके लिए आगे की विधायी प्रक्रिया और राष्ट्रपति द्वारा कार्रवाई की जरूरत होगी।

किन देशों पर पड़ सकता है असर?

विधेयक में रूस से तेल और गैस के प्रमुख खरीदारों के तौर पर भारत, चीन, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया से आने वाले सामान पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की संभावना रखी गई है।

भारत के लिए यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की खरीद करता है। यदि भविष्य में इस प्रावधान का इस्तेमाल किया जाता है, तो भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

क्या भारत पर अभी 100% टैरिफ लगा है?

नहीं। अमेरिकी सीनेट से बिल पारित होना और भारत पर वास्तव में 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होना दो अलग-अलग बातें हैं। सीनेट की मंजूरी के बाद अब विधेयक को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके बाद ही कानून बनने की स्थिति पैदा होगी। इसके अलावा, प्रस्ताव राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार देने की बात करता है; टैरिफ अपने आप लागू नहीं हो जाता।

रूस के अलावा ईरान पर भी प्रावधान

इस विधेयक में केवल रूस से जुड़े प्रतिबंध ही नहीं हैं। इसमें ईरान से संबंधित मौजूदा प्रतिबंधों को आगे बढ़ाने के प्रावधान भी शामिल हैं। इसका व्यापक उद्देश्य रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना तथा उनकी ऊर्जा से जुड़ी गतिविधियों को सीमित करना है।

भारत में इसका क्या असर पड़ेगा?

भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अलग-अलग देशों से कच्चे तेल की खरीद करता रहा है। रूस से होने वाली तेल खरीद भी भारत की ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है। ऐसे में यदि अमेरिका रूस से जुड़े देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लागू करता है, तो इसका असर भारत-अमेरिका व्यापार और भारतीय निर्यातकों पर पड़ सकता है।

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ निश्चित रूप से लागू होगा। लेकिन अमेरिकी सीनेट के इस फैसले ने भारत के लिए संभावित व्यापारिक और कूटनीतिक चुनौती जरूर खड़ी कर दी है

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