The farmers have realized that Shivraj is the culprit, not Mohan!

The farmers have realized that Shivraj is the culprit, not Mohan!

किसानों को समझ आ गया मोहन नहीं शिवराज ही दोषी!

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मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी पर सियासत: क्या केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान किसानों की सबसे बड़ी समस्या को नजरअंदाज कर रहे हैं?

भोपाल में चल रहे किसान आंदोलन के बीच एक बड़ा राजनीतिक सवाल खड़ा हो गया है। प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि अब उनकी नाराजगी केवल राज्य सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी जवाब मांगा जा रहा है।

किसानों का आरोप है कि मूंग की सरकारी खरीदी, एमएसपी और कृषि नीतियों से जुड़े मुद्दों पर उन्हें राहत नहीं मिल रही। इसी कारण बड़ी संख्या में किसान भोपाल में उनके सरकारी आवास तक पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया।

शिवराज सिंह चौहान जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब वे अक्सर कहते थे कि “किसानों का एक-एक दाना खरीदा जाएगा।” लेकिन अब जब वे केंद्र सरकार में कृषि मंत्री हैं, तो किसान सवाल उठा रहे हैं कि आखिर उनके रुख में ऐसा क्या बदल गया कि मूंग उत्पादक किसानों की समस्याएं अब भी जस की तस बनी हुई हैं।

किसानों का कहना है कि जिस नेता ने खुद को वर्षों तक किसान हितैषी बताया, उसी के कार्यकाल में उन्हें अपनी उपज एमएसपी से काफी कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है।

क्या है मूंग खरीदी का पूरा विवाद?

मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि मूंग की सीमित खरीदी के पीछे मुख्य वजह केंद्र सरकार की प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के नियम हैं। इस योजना के तहत उड़द, मसूर और तूर जैसी कुछ दालों की 100 प्रतिशत तक सरकारी खरीदी की जा सकती है, लेकिन मूंग की सरकारी खरीदी अनुमानित उत्पादन के अधिकतम 25 प्रतिशत तक ही सीमित है।

इसी नियम के तहत वर्ष 2026 के लिए केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश में 4.54 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदने की अनुमति दी है।

रिकॉर्ड उत्पादन, लेकिन सीमित खरीदी

इस वर्ष मध्य प्रदेश में मूंग का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। किसानों के अनुसार प्रति एकड़ औसतन 4 से 5 क्विंटल तक पैदावार हुई, लेकिन 25 प्रतिशत खरीद सीमा के कारण सरकार प्रति एकड़ लगभग 1.20 क्विंटल मूंग ही खरीद पा रही है। इसके कारण बड़ी मात्रा में फसल किसानों के पास बच गई है, जिसे उन्हें खुले बाजार में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी कम कीमत पर बेचना पड़ रहा है।

किसानों का कहना है कि जहां वर्ष 2026-27 के लिए मूंग का एमएसपी ₹8,768 प्रति क्विंटल तय किया गया है, वहीं मंडियों में उन्हें केवल ₹4,000 से ₹6,000 प्रति क्विंटल तक का भाव मिल रहा है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सरकार का पक्ष क्या है?

सरकारी स्तर पर यह भी तर्क दिया जा रहा है कि पिछले कुछ वर्षों में कुछ क्षेत्रों में फसलों पर पैराक्वाट (Paraquat) जैसे अत्यधिक जहरीले खरपतवार नाशकों के उपयोग को लेकर चिंताएं सामने आई थीं। इसी कारण खरीदी प्रक्रिया में गुणवत्ता संबंधी नियमों को और सख्त किया गया है। हालांकि सरकार ने आधिकारिक तौर पर इसे मौजूदा सीमित खरीदी का एकमात्र कारण नहीं बताया है।

कृषि मंत्री ने बढ़ाने की मांग की खरीदी सीमा

मध्य प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंसाना ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मूंग खरीदी का कोटा बढ़ाने की मांग की है।

अपने पत्र में उन्होंने कहा कि 14 मई से 3 जुलाई 2026 के बीच राज्य में लगभग 8.06 लाख मीट्रिक टन मूंग का उत्पादन हुआ है, जबकि केंद्र की ओर से केवल 4.54 लाख मीट्रिक टन खरीदी का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने मांग की कि खरीदी का कोटा बढ़ाकर 8.06 लाख मीट्रिक टन किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसानों को एमएसपी का लाभ मिल सके।

किसानों की मांग क्या है?

किसान संगठनों का कहना है कि सरकार को मूंग की खरीदी सीमा बढ़ानी चाहिए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। उनका कहना है कि यदि उत्पादन अधिक हुआ है तो खरीदी की सीमा भी उसी अनुपात में बढ़ाई जानी चाहिए, अन्यथा किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।

फिलहाल इस मुद्दे पर राज्य और केंद्र सरकार के बीच समन्वय की जरूरत महसूस की जा रही है। किसान संगठनों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया, तो आंदोलन आगे भी जारी रह सकता है।

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