CJP प्रोटेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत, छात्रों पर फिलहाल नहीं होगी कार्रवाई
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए ‘चलो संसद’ प्रदर्शन में शामिल छात्रों और प्रदर्शनकारियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।
सर्वोच्च अदालत ने मंगलवार (28 जुलाई) को अंतरिम आदेश जारी करते हुए सभी राज्यों को निर्देश दिया कि प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार किए गए 18 वर्ष से कम उम्र के सभी नाबालिगों को तत्काल रिहा किया जाए। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि जिन प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ दर्ज मामलों में फिलहाल कोई जबरदस्ती की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने CJP के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राहत केवल उन प्रदर्शनकारियों को मिलेगी जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। जिन लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड है, वे इस अंतरिम राहत के दायरे में शामिल नहीं होंगे।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के साथ-साथ महाराष्ट्र, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया। अदालत ने संकेत दिया कि प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए एक स्वतंत्र हाई-पावर्ड कमेटी गठित की जा सकती है।
जांच के दौरान सुरक्षाबलों पर हुए हमलों और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित ज्यादती दोनों पहलुओं की जांच की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि बड़े आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों से निपटने के लिए पुलिस को नए और स्पष्ट प्रोटोकॉल अपनाने की आवश्यकता है। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी भी पक्ष द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग या अधिकारों का उल्लंघन हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
अदालत ने देशभर में CJP प्रोटेस्ट से जुड़े सभी महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया है। इसमें CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा वीडियो, वायरलेस संचार रिकॉर्ड और PCR रिकॉर्ड शामिल हैं। साथ ही प्रदर्शनकारियों के व्यक्तिगत डेटा को सार्वजनिक करने पर भी रोक लगा दी गई है, ताकि जांच प्रभावित न हो और उनकी निजता सुरक्षित रहे।
गौरतलब है कि 20 जुलाई को आयोजित CJP के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प हुई थी। आरोप है कि दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया, जिसके बाद इस मामले में कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गईं।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों के हितों की रक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
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