Datia By-Election: बीजेपी को किसका इंतजार, क्या कोई नरोत्तम से भी उत्तम?

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Datia By-Election: बीजेपी को किसका इंतजार, क्या कोई नरोत्तम से भी उत्तम?

*करीब 2.40 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर राजनीतिक दलों की नजर उन जातियों पर है, जिनका वोट चुनाव का रुख बदल सकता है।
*कांग्रेस से अवधेश नायक का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है

Datia By-Election: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव को लेकर सियासी पारा चरम पर पहुंच चुका है। चुनाव आयोग द्वारा तारीखों के ऐलान (30 जुलाई को मतदान) के बाद ऐसा कहा जा सकता है की भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट को जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी सिलसिले में रविवार 5 जुलाई को राजधानी भोपाल में एक हाई-प्रोफाइल बैठक आयोजित की गई थी, जिसके बाद संभावित उम्मीदवारों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को दिल्ली भेजा गया था। सूत्रों की मानें तो इस पैनल में पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे प्रमुखता से शामिल है।

भोपाल में जुटी भाजपा की त्रिमूर्ति, चुनावी रणनीति पर हुआ मंथन 

जैसा की पहले बताया दतिया (Datia By-Election) फतह करने के लिए रविवार को भोपाल के 74 बंगला स्थित भाजपा कार्यालय में एक बैठक हुई। इस बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल शामिल हुए। घंटों चली इस बैठक में न केवल दतिया उपचुनाव (Datia By-Election) के संगठनात्मक पहलुओं पर चर्चा हुई, बल्कि स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों के नामों पर भी गंभीर मंथन हुआ। बैठक के तुरंत बाद फाइनल पैनल को राष्ट्रीय नेतृत्व के पास अंतिम मुहर के लिए दिल्ली रवाना कर दिया गया।

डॉ. नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी सबसे प्रबल क्यों?

राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी सूत्रों के अनुसार, दतिया से पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को चुनाव मैदान में उतारे जाने की संभावना सबसे अधिक है। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:

पहला है अनुभव और वरिष्ठता- नरोत्तम मिश्रा क्षेत्र के कद्दावर नेता हैं और दतिया उनका पारंपरिक गढ़ रहा है।

दूसरा है हाई-प्रोफाइल मुकाबला- भाजपा इस सीट को किसी भी कीमत पर गंवाना नहीं चाहती क्योंकि यह चुनाव जीतना और हारना बीजेपी के सम्मान से जुड़ा हुआ है, इसलिए उपचुनाव जीतने के लिए वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं की पूरी टीम को दतिया में तैनात करने की योजना बनाई गई है।

कानूनी दांवपेंच और कांग्रेस की नजरें

दतिया का यह उपचुनाव (Datia By-Election) बेहद दिलचस्प मोड़ पर है। एक तरफ जहां भाजपा अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे रही है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती से जुड़े मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है और इस पर जल्द ही फैसला आने की उम्मीद है। इस फैसले का असर भी दतिया के चुनावी समीकरणों पर पड़ना तय माना जा रहा है।

30 जुलाई को परीक्षा, दिल्ली से जल्द आएगा फैसला

चुनाव आयोग के मुताबिक, दतिया उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान होना है। अब सबकी निगाहें दिल्ली में बैठे भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि अगले 48 से 72 घंटों के भीतर भाजपा अपने आधिकारिक उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर सकती है। यदि नरोत्तम मिश्रा के नाम पर मुहर लगती है, तो बुंदेलखंड की राजनीति में एक बार फिर बड़ा दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा।

दतिया चुनाव में जातीय समीकरण सबसे ज्यादा प्रबल

पहले से ही दतिया विधानसभा (Datia By-Election) में जातीय वोट बैंक ही चुनाव की असली ताकत माना जाता है। अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक ब्राह्मण मतदाता करीब 33 से 35 हजार हैं और यह बीजेपी का पारंपरिक वोट बैंक माना जाता है। अनुसूचित जाति के मतदाताओं की संख्या 58 से 60 हजार के बीच बताई जाती है। इनमें अकेले जाटव और अहिरवार समाज के 33 से 40 हजार मतदाता हैं, जिनका झुकाव आमतौर पर कांग्रेस की ओर माना जाता है। कुशवाह समाज के लगभग 28 से 30 हजार मतदाता हैं। पिछले चुनाव में इस समाज की नाराजगी बीजेपी के लिए भारी पड़ी थी।

यादव समाज के मतदाता 14 से 18 हजार के बीच माने जाते हैं और इस बार आजाद समाज पार्टी इन्हीं वोटों में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा ठाकुर समाज के 14 से 18 हजार, वैश्य समाज के 12 से 15 हजार, मुस्लिम मतदाता करीब 7 से 8 हजार और अन्य पिछड़ा वर्ग के 15 से 20 हजार मतदाता भी चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं।

आजाद समाज पार्टी की एंट्री से किसको होगा फायदा?

इस बार आजाद समाज पार्टी ने दामोदर यादव को उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। माना जा रहा है कि उनकी उम्मीदवारी से यादव समाज के साथ-साथ अनुसूचित जाति, खासकर जाटव और अहिरवार समाज के वोटों में भी बिखराव तय है। अगर ऐसा होता है तो इसका सबसे ज्यादा असर कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक पर पड़ सकता है। और फायदा पूरी तरह से बीजेपी के पाले में जाता हुआ नजारा रहा है

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