राजनीति के चाणक्य अमित शाह को लेकर सोशल मीडिया भरा पड़ा है… चर्चाओं का बाजार गर्म है। खबर है कि दो दशक से ज्यादा समय बाद देश में उप प्रधानमंत्री के पद पर किसी की ताजपोशी हो सकती है। इसके लिए गृह मंत्री अमित शाह का नाम चल रहा है।
खबर है कि अमित शाह ने दो टूक कहा है कि भले नरेंद्र मोदी अगले 10 साल प्रधानमंत्री रहें, लेकिन उनको उप प्रधानमंत्री बनाकर उत्तराधिकार की लाइन तय कर दें।
शाह को डिप्टी पीएम बनाने की एकतरफा खबरों के बीच पॉलिटिक्सवाला आज बता रहा है कि अमित शाह को क्यों डिप्टी पीएम नहीं बनना चाहिए। कैसे डिप्टी पीएम बनते ही उनका राजनीतिक करियर खत्म हो जाएगा।
नरेंद्र मोदी 75 की उम्र पार कर चुके हैं और माना जा रहा है कि मौजूदा कार्यकाल उनका आखिरी कार्यकाल हो सकता है।
ऐसे में चर्चा है कि अमित शाह चाहते हैं कि मोदी यह स्पष्ट कर दें कि उनके बाद प्रधानमंत्री अमित शाह बनेंगे। इसके पीछे मीडिया में लंबी-चौड़ी कहानी बनाई गई है। कहा जा रहा है कि अमित शाह को इस बात की चिंता है कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ अगर अगली बार चुनाव जीतकर फिर मुख्यमंत्री बनते हैं, तो वे प्रधानमंत्री पद के लिए और मजबूत दावेदार हो जाएंगे।
दरअसल, नरेंद्र मोदी भी गुजरात में लगातार तीसरी बार चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बनने के बाद ही दिल्ली कूच के लिए तैयार हुए थे। सो, कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य का तीन बार चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी की महत्वाकांक्षाएं बढ़ेंगी और तब उनको रोकना मुश्किल होगा।
ऐसे में मंत्रिमंडल फेरबदल में डिप्टी पीएम बनाए जाने की चर्चा जोर पकड़ रही है। यह तो नहीं कहा जा सकता कि अमित शाह का कोई शुभचिंतक ऐसी बातें फैला रहा है या उनका कोई दुश्मन।
क्योंकि जितना मोदी-शाह को लोग जानते हैं, उनके अगले कदम के बारे में कोई नहीं जानता…
हम आपको बता रहे हैं कि अमित शाह को क्यों डिप्टी पीएम नहीं बनना चाहिए।
पहला कारण…
जैसा कि पूरा देश और भाजपा इस बात को जानते और मानते हैं कि अमित शाह सरकार में नंबर दो पर हैं और संगठन उनके हिसाब से ही चलता है। फिर डिप्टी पीएम बनकर वे क्या नया रुतबा हासिल कर लेंगे? वैसे भी वे अभी डिप्टी पीएम से ज्यादा रुतबे वाले आभामंडल (ओरा) में हैं। एक तरह से शाह का जो रुतबा आज है, वह डिप्टी पीएम बनने के बाद वैसा नहीं रह जाएगा।
दूसरा कारण…
डिप्टी पीएम बनने के बाद अमित शाह के काम का आकलन उस तरह से होने लगेगा। उनके विरोधी उनके फैसलों पर सवाल उठाने लगेंगे। भाजपा संगठन और संघ भी शाह पर बारीक नजर रखेंगे। ऐसे में वे दबाव में आ सकते हैं।
तीसरा कारण…
अमित शाह के बारे में आम आदमी और भाजपा के लोगों को भरोसा है कि मोदी जी अमित शाह की कोई बात नहीं टालते और दोनों की जोड़ी किसी भी मुश्किल हालात का हल निकाल सकती है। शाह के डिप्टी पीएम बनते ही मोदी और शाह दो अलग-अलग सत्ता केंद्र दिखने लगेंगे। अभी तक सत्ता का केंद्र बिंदु मोदी हैं और उसके कार्यकारी अमित शाह। डिप्टी पीएम बनते ही समानांतर दो केंद्र बन जाएंगे, जिससे शाह और मोदी दोनों की राजनीति कमजोर हो सकती है।
चौथा कारण…
अभी भाजपा संगठन में “मोदी के बाद कौन?” वाला सवाल बना हुआ है। इसके लिए बहुत से चेहरे मैदान में हैं। भाजपा की नीतियों को देखते हुए सारे बड़े नेता यह मानकर चलते हैं कि उनमें से कोई भी मोदी का उत्तराधिकारी हो सकता है। खासकर योगी आदित्यनाथ, शिवराज सिंह चौहान जैसे कई नाम हैं। पर शाह के डिप्टी पीएम बनते ही सारे दावेदार एकजुट हो जाएंगे। राजनीति में प्रतिस्पर्धा दुश्मनी की हद तक जाती है। ऐसे में शाह के लिए दिक्कतें पैदा होंगी। फिर बहुत संभव है कि उनका करियर डिप्टी पीएम पद पर ही समाप्त हो जाए।
पांचवां कारण…
हिंदुस्तान में शाह पहले डिप्टी पीएम नहीं होंगे। इससे पहले भी डिप्टी पीएम रहे हैं, पर उन सबको आज कोई याद नहीं रखता। उनमें से 90 फीसदी सिर्फ डिप्टी पीएम बने, उसके बाद उनका करियर खत्म हो गया।
आइए इतिहास पर नजर डालते हैं।
भारत में स्वतंत्रता के बाद से अब तक कुल 7 व्यक्ति उप प्रधानमंत्री के पद पर रहे हैं।
भारत के पहले उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल थे और आखिरी बार इस पद पर लालकृष्ण आडवाणी रहे थे। वर्ष 2004 के बाद से यह पद खाली है।
पहले उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल हों या फिर मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह हों या फिर जगजीवन राम, वाई. वी. चव्हाण हों या फिर चौधरी देवी लाल या फिर लालकृष्ण आडवाणी…
सिर्फ मोरारजी देसाई और चौधरी चरण सिंह को छोड़कर कोई भी प्रधानमंत्री नहीं बन पाया। मोरारजी देसाई और चौधरी चरण सिंह कैसे और कितने वक्त प्रधानमंत्री रहे, यह भी देखना होगा। आज कितने लोग उनको प्रधानमंत्री के तौर पर जानते हैं?
इतना ही नहीं, आखिरी डिप्टी पीएम लालकृष्ण आडवाणी का जलवा अपने दौर में शाह जैसा ही था। लेकिन डिप्टी पीएम बनने के बाद से वे निशाने पर आते गए और वहीं उनका राजनीतिक अध्याय समाप्त हो गया।
और आज उनका कोई नामलेवा नहीं है…
सरदार वल्लभभाई पटेल को छोड़कर कमोबेश यही स्थिति बाकी उप प्रधानमंत्रियों की रही। पटेल भी डिप्टी पीएम के कारण नहीं जाने जाते, बल्कि भारतीय रियासतों को आजाद भारत में विलय की उनकी साहसी सोच और काम ने उनको हमेशा के लिए अमर कर दिया। किसी पद के कारण पटेल नहीं जाने जाते।
ऐसे में अगर शाह को बनना ही है, तो प्रधानमंत्री बनें। डिप्टी पीएम का पद उनके लिए एक लुभावना ऑफर होगा, जो उनके गृह मंत्री रहते अब तक किए गए साहसिक फैसलों को भी पीछे धकेल देगा।
शाह भाजपा के कुशल रणनीतिकार हैं। उन्होंने ऐसे राज्यों में भी सरकार बनवा दी, जहां राजनीतिक पंडित भी नहीं सोच पाते थे।
संघ को भी उनके नाम पर ऐतराज नहीं होगा। जब तक मोदी पीएम रहते हैं, रहें… फिर शाह तो हैं ही।
फिलहाल शाह को प्रधानमंत्री पद के बारे में ही सोचना चाहिए। इससे कम का कोई भी पद उनकी गरिमा को कम करेगा और उनकी छवि को एक पद के पीछे भागने वाले शख्स में बदल देगा।
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