कांग्रेस में गृहयुद्ध
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोमवार को बड़वानी में कहा कि पीसीसी चीफ जीतू पटवारी को मामले की पूरी जानकारी नहीं थी और जिस ट्रस्ट को जमीन दी गई, वह निजी नहीं बल्कि सरकारी न्यास है। वही जीतू पटवारी ने कहा कि उन्होंने सवाल उठाए थे और वे आज भी कायम हैं। मुख्यमंत्री को उनका जवाब देना चाहिए।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस मुद्दे पर उनकी जीतू पटवारी से बात हुई थी। उन्होंने कहा, “जीतू भाई हमारे नेता हैं और मेरे पुत्र समान हैं। उन्होंने जो बयान दिया था, उसके पीछे उन्हें पूरी जानकारी नहीं थी। दिग्विजय ने बताया कि उन्हें भी भाजपा के एक विधायक ने यह जानकारी दी थी, जिनकी मुख्यमंत्री मोहन यादव से नहीं पटती। इसके अलावा एक अखबार में भी यह प्रकाशित हुआ था कि 500 करोड़ रुपए की संपत्ति एक निजी ट्रस्ट को एक रुपए में दे दी गई है। उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की पड़ताल की।
दिग्विजय के मुताबिक, गूगल सर्च और रजिस्ट्रार कार्यालय से दस्तावेज निकलवाने पर पता चला कि संबंधित न्यास सरकारी ट्रस्ट है। उसके मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग में किसी निजी व्यक्ति का उल्लेख नहीं है। ट्रस्ट के पदेन अध्यक्ष मुख्यमंत्री, पदेन उपाध्यक्ष संस्कृति मंत्री और सचिव सरकारी कर्मचारी होते हैं। उन्होंने कहा कि यही जानकारी जीतू पटवारी के पास नहीं थी, इसलिए उन्होंने वह बयान दिया।
जीतू पटवारी से दिग्विजय सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया मांगी तो उन्होंने कहा, “मैंने जो बयान दिया था, वह सवाल के रूप में था और वह आज भी खड़ा है। मुख्यमंत्री से हम रोज सवाल पूछ रहे हैं और उन्हें जवाब देना चाहिए।” पटवारी ने कहा कि दिग्विजय सिंह उनके वरिष्ठ नेता हैं। उन्होंने इस विषय पर अपना पक्ष रखा है और सोशल मीडिया पर भी अपनी बात साझा की है। उन्होंने कहा कि इसमें किसी तरह का विवाद नहीं है।दिल्ली में इस मामले की शिकायत किए जाने के सवाल पर पटवारी ने साफ कहा, “नहीं, कोई शिकायत नहीं हुई है।”
24 जून को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीतू पटवारी ने आरोप लगाया था कि उज्जैन में ‘वीर भारत न्यास’ नाम के ट्रस्ट को करीब 500 करोड़ रुपए मूल्य की सरकारी जमीन मात्र एक रुपए की टोकन राशि पर दे दी गई। उन्होंने दावा किया था कि ट्रस्ट के ट्रस्टी मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी हैं और इतनी मूल्यवान जमीन किस आधार पर दी गई, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।
पटवारी ने मुख्यमंत्री और उनके परिवार की जमीन खरीद, कथित लैंड बैंक, आय के स्रोत और वर्ष 2023 के बाद खरीदी गई संपत्तियों पर श्वेत पत्र जारी करने की भी मांग की थी। साथ ही उन्होंने छह विभागों में तबादलों को लेकर कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया था।इससे पहले शनिवार को उज्जैन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिग्विजय सिंह ने ट्रस्ट डीड और सरकारी दस्तावेज दिखाते हुए कहा था कि संबंधित ट्रस्ट पूरी तरह सरकारी और सार्वजनिक न्यास है। उन्होंने कहा कि उनके मुख्यमंत्री रहते हुए भी यही व्यवस्था थी और बाद में कमलनाथ सरकार के समय भी यही प्रावधान लागू रहा।
दिग्विजय ने कहा था कि सरकारी न्यास को एक रुपए में जमीन दिए जाने में कोई अनियमितता नहीं है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की थी कि कुछ दलाल किस्म के लोग झूठे आरोप लगाकर ब्लैकमेलिंग का खेल खेलते हैं।
You may also like
-
गुजरात और असम के छात्र आंदोलन से कितना अलग है सीजेपी का प्रदर्शन ?
-
मातम का पर्व मोहर्रम मनाने का सही तरीका क्या है?
-
हाईकोर्ट में कांग्रेस को बड़ा झटका, कांग्रेस विधायक की सदस्या रद्द करने से अदालत का इंकार
-
500 करोड़ की जमीन 01 रुपये में देने के पीछे का सच
-
हे राम… राम मंदिर में, चंदा के बाद चांदी भी चोरी!
