मोहन कैबिनेट से थके चेहरे हटेंगे, चकदार होगी वापसी
भोपाल। मध्यप्रदेश में मंत्रीमंडल विस्तार की चर्चा है। मंत्रिमडल में कुल 35 सीटें हैं। अभी इसमें से चार सीटें खाली हैं। यानी 4 नए मंत्री बनाये जा सकते हैं। हमेशा की तरह अलग-अलग फॉर्मूले के घोड़े दौड़ाये जा रहे हैं। इस बार जो विस्तार होगा वो मुख्यतः महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने और सिंधिया गुट की बढ़ती ताकत को संतुलित करने वाला रहेगा।
मंत्रिमंडल फेरबदल का मुख्य आधार मंत्रियों का कामकाज रहेगा। अलग-अलग विभागों की समीक्षा बैठक में कई कामकाज रहा है। ऐसे मंत्रियों को रखकर पार्टी अगले विधानसभा चुनाव में किसी तरह की रिस्क नहीं लेना चाहती। मंत्रिमंडल विस्तार में कुछ बड़े बदलाव
जो हो सकते हैं उनको सिलसिलेवार समझते हैं।
ये वरिष्ठ कहीं और होंगे एडजस्ट
1 – कैलाश विजयवर्गीय – कैलाश विजयवर्गीय का मुख्यमंत्री के साथ तालमेल ठीक नहीं चल रहा है। वे अपने खुद के गृह नगर इंदौर मे भी उनकी आवाज
का वजन कम पड़ गया है। खुद विजयवर्गीय मंत्री पद छोड़कर संगठन में जाने की इच्छा जता चुके हैं।
2 . प्रह्लाद पटेल – विजयवर्गीय की तरह पटेल भी वर्तमान मंत्रिमंडल में अनमने से हैं। वे केंद्र में लम्बे समय तक मंत्री रहे ऐसे में वे प्रदेश के युवा नेतृत्व और
युवा साथियों के साथ सहज नहीं है। उनके विभाग की समीक्षा रिपोर्ट भी बहुत बेहतर नहीं है।
3 . राकेश सिंह – केंद्र में मंत्री रहे। अब मध्य्रपदेश की राजनीति में वे खुद को बहुत सहज नहीं कर पा रहे हैं। वैसे राकेश सिंह के विभाग की रिपोर्ट बहुत
अच्छी है। उनके विभाग में नवाचार हो रहे हैं, उनके साथ दिक्कत है भोपाल और जबलपुर तक ही सीमित रहना।
विवादों के चलते संकट में
1 . विजय शाह- कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी के बाद वे आलोचनाओं के केंद्र में हैं।
2 . प्रतिमा बागरी- जाति प्रमाण पत्र संबंधी विवाद भाई की गिरफ्तारी का मामला भी दिल्ली तक।
3 . राधा सिंह: पहली बार विधायक बनीं राधा सिंह की विभाग पर कमजोर पकड़ा , काम धीमा।
4 . एदल सिंह कंषाना -रेत मफिया का पक्ष लेना, उनके विभाग में रिश्वत के कई मामले उठे
5 . गोविन्द सिंह राजपूत – इनका विभाग विस्तार में बदले जाने की पूरी सम्भावना है।
6 . इन्दर सिंह परमार – उच्च शिक्षा विभाग में भारी गड़बड़ी की शिकायतें, जिसके चलते विभाग बदल सकता है।
ये संभावित चेहरे
महिला नेतृत्व – प्रतिमा बागरी और राधा सिंह के बाहर होने की दशा में इंदौर से मालिनी गौड़, बुरहानपुर से पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस और रीवा रीती पाठक की मबजूत दावेदारी है। मालिनी गौड़ मंत्री तभी बनेंगी जब कैलाश विजयवर्गीय मंत्रिमंडल से बाहर होंगे। अर्चना चिटनीस पहले मंत्री रह चुकी हैं
संघ भी उनके नाम पर सहमत है। रीति पाठक की दावेदारी नए चेहरे के तौर पर है।
पूर्व मंत्रियों की वापसी संभव
भूपेंद्र सिंह – शिवराज के बेहद करीबी पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह की वापसी की प्रबल सम्भावना है। इसके पीछे बड़ा कारण सागर में सिंधिया समर्थक
गोविन्द सिंह राजपूत के एकतरफा बढ़ते कद को संतुलित करना है। दूसरा कांग्रेस से भाजपा के पाले में आई निर्मला सप्रे के चलते भी
इस इलाके में भाजपा को मुश्किल का सामना करना पड़ सकता हैं। ऐसे भूपेंद्र सिंह बड़ा केंद्र बनेंगे।
प्रभुराम चौधरी – सिंधिया के करीबी प्रभुराम चौधरी पहले स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं। चौधरी के वापस शपथ लेने की सम्भावना है। इसके पीछे सिंधिया
गुट में संतुलन साधना भी है। तुलसी सिलावट और गोविन्द सिंह राजपूत के पोर्टफोलियो बदले जाने की प्रबल सम्भावना है। ऐसे में
इस गुट के प्रभुराम चौधरी को आगे लेकर सत्ता संतुलन किया जा सकता है।
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