सुभाषचंद्र बोस को ‘राष्ट्रपुत्र’ घोषित करने की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने किया ख़ारिज

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कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कहा- पब्लिसिटी लिए सब करते हो, कोर्ट में एंट्री कर देंगे बैन

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सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ‘राष्ट्रपुत्र’ घोषित करने और आजाद हिंद फौज (INA) को भारत की आजादी का श्रेय देने की मांग वाली जनहित /याचिका खारिज कर दी।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को “न सुधरने वाला” बताया और सख्त टिप्पणी की।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने याचिकाकर्ता पिनाकपानी मोहंती को फटकार लगाई।

कोर्ट ने कहा कि वह पहले भी इसी तरह की याचिकाएं दाखिल कर चुके हैं और अब अदालत का समय बर्बाद कर रहे हैं।

कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो याचिकाकर्ता के सुप्रीम कोर्ट में आने पर भी रोक लगाई जा सकती है।

साथ ही रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया कि भविष्य में उनकी कोई याचिका मंजूर न की जाए।

सुभाषचंद्र बोस को ‘राष्ट्रपुत्र’ घोषित करने की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने किया ख़ारिज

ये थीं याचिकाकर्ता की मांगें

1.नेताजी सुभाष चंद्र बोस को राष्ट्रीय पुत्र के रूप में मान्यता दी जाए।

2.भारतीय राष्ट्रीय सेना के स्थापना दिवस 21 अक्टूबर, 1943 को राष्ट्रीय दिवस घोषित किया जाए।

3.नेताजी की जयंती 23 जनवरी 1897 को राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाए।

पहले भी खारिज हो चुकी है याचिका

मोहंती ने इससे पहले 2024 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत की जांच की मांग करते हुए एक जनहित याचिका दायर की थी।

उस मामले में, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने याचिकाकर्ता के इरादों पर सवाल उठाया था।

साथ ही चुनावों के संदर्भ में याचिका दायर करने के समय पर सवाल पूछा था।

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