ईरान बनाम इसराइल: कौन ज्यादा ताक़तवर, किसका पलड़ा भारी?
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और इसराइल आमने-सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं। हालिया सैन्य कार्रवाइयों के बाद यह सवाल तेज़ हो गया है कि अगर दोनों देशों के बीच सीधा टकराव होता है, तो किसकी ताक़त ज्यादा है। सैन्य क्षमता, तकनीक, मिसाइल सिस्टम, जनसंख्या और भूगोल—इन सभी पहलुओं पर नज़र डालना ज़रूरी हो जाता है।
सैन्य बजट और तकनीकी ताक़त
इसराइल की सबसे बड़ी ताक़त उसकी अत्याधुनिक सैन्य तकनीक मानी जाती है। अंतरराष्ट्रीय रक्षा रिपोर्ट्स के मुताबिक इसराइल का रक्षा बजट ईरान की तुलना में कहीं अधिक है। उन्नत लड़ाकू विमान, सटीक हथियार प्रणाली और आधुनिक खुफिया तंत्र इसराइल को तकनीकी रूप से मज़बूत बनाते हैं।
इसराइल के पास एफ-15 और एफ-35 जैसे स्टेल्थ फाइटर जेट हैं, जो रडार से बचकर सटीक हमले करने में सक्षम हैं। दूसरी ओर, ईरान के पास बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान ज़रूर हैं, लेकिन उनमें से कई पुराने माने जाते हैं, जिनकी ऑपरेशनल क्षमता पर सवाल उठते रहे हैं।
मिसाइल डिफेंस बनाम मिसाइल ताक़त
मिसाइल युद्ध की बात करें तो ईरान को मध्य-पूर्व की सबसे बड़ी मिसाइल शक्ति माना जाता है। अनुमान है कि ईरान के पास हज़ारों बैलिस्टिक मिसाइलें और बड़ी संख्या में ड्रोन हैं, जिनका इस्तेमाल वह पहले भी कर चुका है।
वहीं इसराइल की ताक़त उसका मिसाइल डिफेंस सिस्टम है। आयरन डोम और ऐरो जैसे सिस्टम हवा में ही मिसाइलों और ड्रोन को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। हाल के हमलों में इसराइल ने बड़ी संख्या में मिसाइलों को हवा में ही गिराने का दावा किया है, जिससे उसकी रक्षा प्रणाली की मजबूती सामने आती है।
नौसेना, साइबर वॉर और परमाणु पहलू
नौसेना के स्तर पर ईरान के पास जहाजों की संख्या अधिक है, लेकिन तकनीक और आधुनिकीकरण में इसराइल आगे माना जाता है। ईरान की नौसैनिक रणनीति तेज़ रफ्तार स्पीडबोट्स और क्षेत्रीय दबदबे पर आधारित है।
साइबर युद्ध में इसराइल को बढ़त मानी जाती है। उसकी साइबर सुरक्षा और साइबर आक्रमण क्षमताएं काफी विकसित हैं। परमाणु हथियारों के मामले में इसराइल के पास परमाणु क्षमता होने की व्यापक धारणा है, हालांकि उसने कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की। ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन वह इन्हें नकारता है।
भूगोल, जनसंख्या और सेना की संख्या
भूगोल और जनसंख्या के लिहाज़ से ईरान इसराइल से कहीं बड़ा देश है। ईरान की आबादी लगभग नौ करोड़ है, जबकि इसराइल की आबादी करीब एक करोड़ मानी जाती है। सैनिकों की संख्या में भी ईरान आगे है उसके पास सक्रिय सैनिकों की संख्या इसराइल से कई गुना अधिक है।
हालांकि सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि आधुनिक युद्ध सिर्फ संख्या से नहीं, बल्कि तकनीक, प्रशिक्षण और रणनीति से जीता जाता हैब जहां इसराइल की पकड़ मजबूत मानी जाती है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो ईरान और इसराइल की ताक़त अलग-अलग क्षेत्रों में बंटी हुई है। ईरान के पास संख्या, मिसाइल भंडार और भौगोलिक विस्तार की बढ़त है, जबकि इसराइल तकनीक, मिसाइल डिफेंस, साइबर क्षमता और सटीक हमलों में आगे है। किसी भी संभावित संघर्ष में सीधा जवाब देना आसान नहीं होगा और इसका असर पूरे मध्य-पूर्व ही नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति पर भी पड़ेगा।
इस टकराव में दुनिया की निगाहें अब अयातुल्लाह अली ख़ामनेई और बिन्यामिन नेतन्याहू के अगले कदमों पर टिकी हैं, क्योंकि एक फैसला पूरे क्षेत्र की दिशा बदल सकता है।
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