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एमपी बजट 2026: ई-बस, स्वास्थ्य और किसानों पर बड़ा फोकस, विकास की नई दिशा है यह बजट
मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 का बजट विधानसभा में पेश करते हुए प्रदेश के शहरी परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं, ग्रामीण विकास और कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता दी है।
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने इसे रोजगार, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने वाला बजट बताया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार का यह तीसरा बजट है, जिसमें बुनियादी ढांचे के साथ सामाजिक योजनाओं को भी बड़ा वित्तीय समर्थन दिया गया है।
शहरों में ई-बसों से बदलेगा परिवहन तंत्र
प्रदेश के छह प्रमुख शहरों—भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर और उज्जैन—में 472 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना पर काम शुरू हो चुका है।
इसका उद्देश्य प्रदूषण कम करना, सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाना और यात्रियों को सुरक्षित व सस्ती यात्रा उपलब्ध कराना है।
ई-बस सेवा से शहरों में ट्रैफिक दबाव कम होने की उम्मीद है। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की नीति के तहत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।
सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में शहरी परिवहन को पर्यावरण-अनुकूल बनाना है।
स्वास्थ्य क्षेत्र को 23000 करोड़ से अधिक
बजट में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 23,747 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
यह राशि अस्पतालों के उन्नयन, नए स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना, चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर खर्च होगी।
सरकार का फोकस प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को गांव स्तर तक मजबूत करने पर है, ताकि लोगों को बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े।
मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और आपात चिकित्सा सेवाओं को भी प्राथमिकता दी गई है।
महिला एवं बाल कल्याण योजनाओं के लिए कुल 1.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान भी इसी दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
सड़क और गांव विकास में बड़ा निवेश
ग्रामीण कनेक्टिविटी सुधारने के लिए 21,630 करोड़ रुपये की मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना को मंजूरी दी गई है।
इस योजना से छोटे-छोटे गांवों और बसाहटों को मुख्य सड़कों से जोड़ा जाएगा।
इसके अलावा ग्रामीण विकास को गति देने के लिए मुख्यमंत्री वृंदावन योजना और कौशल प्रशिक्षण से जुड़ी अहिल्या बाई कौशल विकास योजना का विस्तार किया गया है।
इन योजनाओं का उद्देश्य गांवों में रोजगार बढ़ाना और युवाओं को स्थानीय स्तर पर काम उपलब्ध कराना है।
सरकार का दावा है कि बेहतर सड़क और कनेक्टिविटी से कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
किसानों के लिए सोलर पंप और प्रोत्साहन योजनाएं
कृषि क्षेत्र को समर्थन देते हुए सरकार ने 3,000 करोड़ रुपये की लागत से 1 लाख सोलर पंप किसानों को देने की घोषणा की है।
इससे सिंचाई खर्च कम होगा और बिजली पर निर्भरता घटेगी। किसान परिवारों को किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत सालाना 12,000 रुपये मिलते रहेंगे।
साथ ही कृषक उन्नति योजना के माध्यम से किसानों को अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है।
जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 21.42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पंजीकृत किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे उत्पादन लागत घटेगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी।
समग्र रूप से देखा जाए तो एमपी बजट 2026 शहरी परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं, ग्रामीण कनेक्टिविटी और कृषि सुधार को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है।
सरकार ने इसे विकास और जनकल्याण के संतुलन वाला बजट बताया है, जबकि विपक्ष ने इसके क्रियान्वयन पर सवाल उठाए हैं।
आने वाले समय में इन घोषणाओं का वास्तविक असर जमीन पर कितना दिखता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
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