केंद्र से 10 महीने में सिर्फ 22% फंड, एमपी के 25 विभागों को एक रुपया भी नहीं

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केंद्र से 10 महीने में सिर्फ 22% फंड, एमपी के 25 विभागों को एक रुपया भी नहीं

मध्य प्रदेश को चालू वित्त वर्ष 2024-25 में केंद्र सरकार से कुल 44,355.83 करोड़ रुपये मिलने थे लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण की 1 अप्रैल 2025 से 20 जनवरी 2026 तक केवल 9,753.05 करोड़ रुपये ही जारी किए गए हैं।

यानी 10 महीने बीतने के बाद भी राज्य को महज 22 प्रतिशत केंद्रीय सहायता ही मिल पाई है। चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश सरकार के 25 विभाग इसी हाल में हैं, जिन्हें इस पूरे अवधि में केंद्र से एक रुपया भी नहीं मिला है।

इनमें किसान कल्याण, कृषि विकास, ग्रामीण विकास, जल संसाधन, नगरीय विकास, स्कूल शिक्षा, जनजातीय कार्य, महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य और ऊर्जा जैसे अहम विभाग शामिल हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कई बार मंत्रियों को दिल्ली जाकर केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करने और लंबित फंड लाने के निर्देश दिए लेकिन इसके बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। फंड की कमी का सीधा असर विकास योजनाओं, पेंशन भुगतान, स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे के कार्यों पर पड़ रहा है।

शिवराज सिंह चौहान के मंत्रालयों से ही अटके 7,774 करोड़ रुपये

सबसे ज्यादा चर्चा में वह विभाग हैं, जो खुद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अधीन आते हैं। किसान कल्याण, कृषि विकास और ग्रामीण विकास मंत्रालयों से मध्य प्रदेश को कुल 7,774.54 करोड़ रुपये मिलने थे, लेकिन यह राशि अब तक जारी नहीं की गई है।

प्रदेश में किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग की जिम्मेदारी मंत्री एदल सिंह कंसाना के पास है। विभाग को परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत 29.95 करोड़ और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 165 करोड़ रुपये मिलने थे लेकिन एक भी रुपया जारी नहीं हुआ।

अन्य योजनाओं को मिलाकर किसान कल्याण विभाग को कुल 996.34 करोड़ रुपये स्वीकृत हैं लेकिन पूरी राशि दिल्ली में ही अटकी हुई है। ग्रामीण विकास विभाग की स्थिति भी इससे बेहतर नहीं है। पीएम जनमन योजना के लिए 660 करोड़, पीएम जनमन योजना के लिए 633.60 करोड़, पीएम आवास योजना के लिए 2,640 करोड़ और मनरेगा के लिए 3,160 करोड़ रुपए मिलने थे,।

लेकिन पीएम आवास योजना को छोड़कर बाकी योजनाओं में या तो बहुत कम राशि मिली या बिल्कुल नहीं मिली। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए तय 810 करोड़ रुपये में से एक रुपया भी नहीं आया है।

जल जीवन मिशन, केन-बेतवा और ऊर्जा योजनाओं पर पूरी तरह ब्रेक

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को जल जीवन मिशन के तहत 8,561.22 करोड़ रुपये मिलने थे लेकिन 10 महीनों में एक रुपया भी जारी नहीं किया गया। विभाग की मंत्री संपतिया उइके पर कमीशनखोरी के आरोपों के बाद दिल्ली में शिकायत दर्ज हुई, जिसके चलते विभाग के ईएनसी द्वारा जांच के आदेश दिए गए।

वहीं मुख्य सचिव अनुराग जैन ने जल जीवन मिशन में अनियमितताओं को लेकर संबंधित एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने और इंजीनियरों को नोटिस देने की कार्रवाई भी की है। जल संसाधन विभाग को केन बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना के लिए 630 करोड़ रुपये मिलने थे, लेकिन इस परियोजना के लिए भी केंद्र से कोई राशि जारी नहीं हुई।

इसके अलावा बांधों से जुड़े कार्यों के लिए प्रस्तावित 290 करोड़ रुपये भी अटके हुए हैं। ऊर्जा विभाग को आरडीएसएस (रीवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम) के तहत 1,736.33 करोड़ रुपये मिलने थे, लेकिन यहां भी केंद्र से एक रुपया भी नहीं मिला है।

स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाएं भी फंड संकट में

डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के पास लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग है लेकिन इन विभागों को मिलने वाली केंद्रीय सहायता भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। लोक स्वास्थ्य विभाग को उप-स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 724 करोड़ रुपये मिलने थे। सिकल सेल एनीमिया के लिए 23.28 करोड़, नए नर्सिंग कॉलेजों के लिए 37.50 करोड़, जिला स्तरीय स्वास्थ्य अमले के लिए 97.24 करोड़ और एमबीबीएस सीटों में वृद्धि के लिए 90 करोड़ रुपये का प्रावधान था लेकिन एक भी योजना में पूरी राशि नहीं मिली।

पीएम जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के लिए 765.96 करोड़ रुपये निर्धारित थे, लेकिन यह राशि भी नहीं आई। नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए 250 करोड़ और मेडिकल कॉलेजों में पीजी पाठ्यक्रमों के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान था लेकिन केंद्र से कोई फंड जारी नहीं किया है।

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स्कूल शिक्षा विभाग की हालत भी चिंताजनक है। पीएमश्री विद्यालय योजना के तहत 258 करोड़ रुपये मिलने थे लेकिन एक रुपया भी जारी नहीं हुआ। समग्र शिक्षा अभियान में 3,321.99 करोड़ रुपये में से केवल 1,460.75 करोड़ ही मिले हैं। स्टार्स परियोजना के लिए तय 100.80 करोड़ रुपये भी अब तक नहीं आए।

नगरीय विकास, आवास और परिवहन योजनाएं ठप

नगरीय विकास एवं आवास विभाग, जिसकी जिम्मेदारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पास है, सबसे ज्यादा प्रभावित विभागों में शामिल है। पीएम आवास योजना (अर्बन) बीएलसी के लिए 600 करोड़, एएचपी के लिए 150 करोड़, हाउसिंग फॉर ऑल के लिए 250.86 करोड़ और अमृत 2.0 के लिए 471 करोड़ रुपये मिलने थे, लेकिन एक भी योजना में राशि जारी नहीं की गई।

पीएम ई-बस सेवा के लिए 65.99 करोड़ और शहरी स्वच्छ मिशन 2.0 के तहत आईईसी के लिए 48 करोड़ रुपये मिलने थे, लेकिन यहां भी फंड शून्य है। सिर्फ उज्जैन स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए केंद्र से 5 करोड़ रुपये मिले हैं, जिसे छोड़ दें तो पूरा विभाग लगभग थप स्तिथि में है।

पेंशन, पोषण और जनजातीय योजनाओं पर भी संकट

महिला एवं बाल विकास विभाग को पीएम मातृ वंदना योजना के लिए 211.20 करोड़ रुपये मिलने थे लेकिन केवल 55.26 करोड़ रुपये ही जारी किए गए। विशेष पोषण आहार योजना के लिए तय 583 करोड़ रुपये में से एक भी रुपया नहीं मिला

आंगनबाड़ी सेवाओं के तहत सक्षम आंगनबाड़ी और पोषण 2.0 के लिए 3,263.59 करोड़ रुपये मिलने थे, लेकिन अब तक सिर्फ 759.29 करोड़ रुपये ही मिले हैं।
जनजातीय कार्य विभाग को धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, माडा पैकेट और पीएम जनमन बहुउद्देशीय केंद्र जैसी योजनाओं के लिए कुल सैकड़ों करोड़ रुपये मिलने थे, लेकिन किसी भी योजना में एक रुपया नहीं आया है।

सामाजिक न्याय विभाग को विधवा और वृद्धावस्था पेंशन के लिए तय राशि का केवल आंशिक भुगतान हुआ है, जिससे पेंशन वितरण पर असर पड़ रहा है।


 

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