शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती: हाल के दिनों में संत-समाज और धार्मिक गलियारों में एक बयान को लेकर काफी चर्चाएं हो रही है। प्रसिद्ध संत, कथावाचक और तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बवाल खड़ा कर दिया है। रामभद्राचार्य के बयान में देशद्रोह का मुकदमा जैसे कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिसके बाद यह सवाल उठने लगा कि आखिर उन्होंने इस तरह से बात क्यों कही है।
रामभद्राचार्य ने मीडिया से बातचीत में कहा कि धर्मगुरुओं की जिम्मेदारी समाज को जोड़ने की होती है, न कि देश को कमजोर करने वाले विचार फैलाने की। उनके अनुसार, अगर कोई संत या शंकराचार्य अपने वक्तव्यों से ऐसे संदेश देता है, जो राष्ट्रविरोधी तत्वों को बल दें या देश की अखंडता पर चोट करें, तो उस पर कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
जगद्गुरु ने क्यों कहा शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को देशद्रोही?
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर बेहद कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति कश्मीर में अनुच्छेद 370 को दोबारा लागू करने की बात करता हो, उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाए जाने का समर्थन करता हो और बालासाहेब ठाकरे को जनाब कहकर संबोधित करता हो, उसे वे शंकराचार्य मान ही नहीं सकते। रामभद्राचार्य के मुताबिक, उन्होंने शुरुआत से ही स्पष्ट कर दिया था कि ऐसे विचार रखने वाला व्यक्ति शंकराचार्य की मर्यादा और परंपरा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि शंकराचार्य का पद राष्ट्र और सनातन परंपरा की रक्षा से जुड़ा होता है, न कि ऐसे बयानों से जो देश की एकता और संवैधानिक निर्णयों पर सवाल खड़े करें।
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