सुनीता विलियम्स: प्रसिद्ध अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष एजेंसी NASA में 27 वर्षों की ऐतिहासिक सेवा के बाद आधिकारिक रूप से रिटायर हुईं हैं। रिटायरमेंट के बाद भारत दौरे पर पहुंचीं सुनीता विलियम्स ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम ‘आंखें सितारों पर, पैर जमीं पर‘ के दौरान अपने अनुभव, भविष्य की योजनाओं और भारत से अपने भावनात्मक रिश्ते को लेकर खुलकर बात की।
विलियम्स ने कहा भारत आना घर बापसी जैसा अनुभव देता है
मीडिया से बातचीत करते हुए सुनीता विलियम्स ने कहा कि भारत आना उनके लिए हमेशा “घर वापसी” जैसा अनुभव होता है। उन्होंने कहा, मेरे पिता भारतीय हैं और भारत से मेरा भावनात्मक जुड़ाव बहुत गहरा है। यहां आकर मुझे अपनापन महसूस होता है। उन्होंने भारतीय छात्रों और युवाओं को विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी किया।
अपने अंतरिक्ष करियर को याद करते हुए सुनीता विलियम्स ने बताया कि नासा में बिताए गए 27 साल उनके जीवन के सबसे चुनौतीपूर्ण और रोमांचक वर्ष रहे। उन्होंने दो बार अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा की और कई स्पेसवॉक भी किए। और वे स्पेसवॉक करने वाली पहली महिला बन गईं। अंतरिक्ष में लंबा समय बिताने वाली महिला अंतरिक्ष यात्रियों में उनका नाम प्रमुख रूप से लिया जाता है।
कार्यक्रम के दौरान जब उनसे भविष्य की योजनाओं को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वह चांद पर जाना तो चाहती हैं। हालांकि, इस बात को उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में जोड़ते हुए कहा, “लेकिन मुझे नहीं लगता कि मेरे पति इसकी इजाजत देंगे।” उनके इस बयान पर कार्यक्रम में मौजूद लोग हंस पड़े। सुनीता ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल वह अंतरिक्ष मिशनों से दूरी बनाए रखेंगी, लेकिन अंतरिक्ष विज्ञान से उनका जुड़ाव हमेशा बना रहेगा।
सुनीता विलियम्स ने भारत के बढ़ते अंतरिक्ष कार्यक्रम की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और आने वाले समय में भारतीय अंतरिक्ष एजेंसियां वैश्विक स्तर पर और मजबूत भूमिका निभाएंगी। उन्होंने भारतीय युवाओं को संदेश दिया कि अगर उनमें जुनून और मेहनत करने की क्षमता है, तो अंतरिक्ष जैसे कठिन क्षेत्र में भी वे सफलता हासिल कर सकते हैं।
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रिटायरमेंट के बाद के जीवन को लेकर सुनीता विलियम्स ने कहा कि अब वह अपने अनुभवों को शिक्षा, प्रेरणात्मक कार्यक्रमों और युवाओं के मार्गदर्शन में लगाना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष यात्रियों का अनुभव केवल मिशन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है।
सुनीता विलियम्स का यह बयान और भारत को लेकर उनका भावनात्मक जुड़ाव एक बार फिर यह दिखाता है कि वे न सिर्फ एक सफल अंतरिक्ष यात्री हैं, बल्कि भारत और भारतीय संस्कृति से गहराई से जुड़ी एक प्रेरणादायक शख्सियत भी हैं।
स्पेस से धरती एक दिखती है, हम सब एक हैं: सुनीता विलियम्स
सुनीता विलियम्स ने अपने अंतरिक्ष अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि जब धरती को अंतरिक्ष से देखा जाता है, तो यह एहसास होता है कि पूरी मानवता एक है और हमें मिल-जुलकर काम करने की जरूरत है। 60 वर्षीय सुनीता विलियम्स का आखिरी स्पेस मिशन भले ही सिर्फ 10 दिनों का तय था, लेकिन तकनीकी कारणों से उन्हें International Space Station पर करीब साढ़े नौ महीने तक रहना पड़ा।
सुनीता वर्ष 1998 में NASA से जुड़ी थीं और 27 साल के करियर में उन्होंने तीन अंतरिक्ष मिशनों में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए। 9 दिसंबर 2006 को उन्होंने पहली बार अंतरिक्ष यात्रा की थी। अपने करियर में सुनीता ने 9 स्पेसवॉक किए और 62 घंटे 6 मिनट तक अंतरिक्ष में चहलकदमी की, जो किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री के लिए रिकॉर्ड है। वह अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली पहली महिला भी बनीं।
भारत को लेकर उन्होंने कहा कि यहां आना उन्हें घर वापसी जैसा लगता है, क्योंकि उनके पिता गुजरात के मेहसाणा जिले के झूलासन गांव से थे। चंद्रमा पर जाने के सवाल पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वह जाना तो चाहती हैं, लेकिन पति इजाजत नहीं देंगे। अंतरिक्ष में बढ़ते कचरे को उन्होंने भविष्य की बड़ी चुनौती बताया और नई तकनीक की जरूरत पर जोर दिया।
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