Pak PM Shehbaz Sharif: भारत द्वारा 1960 के सिंधु जल समझौते को अस्थायी रूप से निलंबित करने के बाद से पाकिस्तान में राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व दोनों स्तरों पर बौखलाहट है।
पिछले 48 घंटों के अंदर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो और पाक सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने एक के बाद एक भारत को धमकियां दी है।
दरअसल, 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए 24 अप्रैल को सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था।
फैसला कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में हुआ था। भारत का कहना है कि पाकिस्तान आतंकवाद को संरक्षण दे रहा है और ऐसे में किसी भी समझौते का पालन करना संभव नहीं है।
एक बूंद पानी नहीं छिनने देंगे- शहबाज
मंगलवार को इस्लामाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत पर निशाना साधते हुए कहा कि दुश्मन (भारत) पाकिस्तान से एक बूंद पानी भी नहीं छीन सकता।
भारत अगर पाकिस्तान की ओर बहने वाले पानी को रोकने की कोशिश करता है तो यह सिंधु जल संधि का उल्लंघन होगा, जिसका जवाब निर्णायक और यादगार तरीके से दिया जाएगा।
शरीफ ने कहा, पानी पाकिस्तान की लाइफलाइन है। अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत हमें जो अधिकार मिले हैं, उनसे हम किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे।
भारत को अगर लगता है कि वह हमारे हिस्से का पानी रोक सकता है तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल होगी।
#BREAKING: Pakistan Prime Minister Shehbaz Sharif warns India of serious consequences if India stops Indus Water Treaty. Says, he won’t let India take even a drop of Pakistan’s share of water. This is 4th threat from Pak in 48 hours after Asim Munir, Bilawal Bhutto, Khawaja Asif. pic.twitter.com/ER1uojwHoi
— Aditya Raj Kaul (@AdityaRajKaul) August 12, 2025
बिलावल भुट्टो की युद्ध की धमकी
शरीफ से एक दिन पहले, 11 अगस्त को सिंध प्रांत की एक सभा में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता और पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने भी धमकी दी थी।
भुट्टो ने कहा कि मोदी सरकार के कदमों ने पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचाया है।
अगर भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित रखने का फैसला जारी रखा, तो पाकिस्तान के पास युद्ध के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
हमें एकजुट होकर इन आक्रामक नीतियों का जवाब देना होगा। पाकिस्तान के लोग छह नदियों को वापस लेने के लिए युद्ध करने में सक्षम हैं।
⚡ BREAKING: Former Pakistani Foreign Minister Bilawal Bhutto threatens war against India if India continues to put Indus Water Treaty in abeyance & constructs a dam. pic.twitter.com/DW6f3b0AJA
— OSINT Updates (@OsintUpdates) August 11, 2025
मुनीर की परमाणु हमले की चेतावनी
इससे पहले 10 अगस्त को, डेढ़ महीने में दूसरी बार अमेरिका दौरे पर गए पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने भी तीखी चेतावनी दी थी।
उन्होंने कहा कि सिंधु नदी भारत की फैमिली प्रॉपर्टी नहीं है, अगर भारत कोई बांध बनाता है तो पाकिस्तान उसे 10 मिसाइलों से ध्वस्त कर देगा।
हम एक परमाणु संपन्न राष्ट्र हैं और अगर हमें लगता है कि हम डूब रहे हैं, तो हम आधी दुनिया को अपने साथ ले जाएंगे।
मुनीर की परमाणु धमकी के जवाब भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा- परमाणु हथियार की धमकी देना पाकिस्तान की पुरानी आदत है।
भारत न्यूक्लियर ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा। हमें अपनी सुरक्षा करना आता है। लेकिन, किसी मित्र देश की धरती से की गई ये टिप्पणी खेदजनक है।
भारत के प्रोजेक्ट से पाक परेशान
यह तनाव उस समय और बढ़ गया जब भारत ने जम्मू-कश्मीर के सिंधु गांव के पास चिनाब नदी पर नेशनल हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की।
पाकिस्तान को डर है कि इस प्रोजेक्ट के जरिए भारत पानी रोक सकता है, जिससे उसकी कृषि, सिंचाई और बिजली उत्पादन पर गंभीर असर पड़ेगा।
भारत का रुख स्पष्ट है कि यह प्रोजेक्ट पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय मानकों और भारत के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
भारत पहले से सतलुज, ब्यास और रावी नदियों के पानी का नियंत्रण रखता है।
पाकिस्तान की चिंता है कि अगर सिंधु और झेलम जैसी अन्य नदियों पर भी भारत ने प्रभाव बढ़ाया, तो उसका पानी संकट गंभीर हो जाएगा।
कैसे हुई थी सिंधु जल संधि ?
सिंधु नदी प्रणाली में छह नदियां शामिल हैं — सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज।
इस प्रणाली का जलक्षेत्र लगभग 11.2 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है, जिसमें 47% क्षेत्र पाकिस्तान, 39% भारत, 8% चीन और 6% अफगानिस्तान में है।
1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन से पहले ही पंजाब और सिंध क्षेत्र के बीच पानी के बंटवारे का विवाद शुरू हो गया था।
1947 में ‘स्टैंडस्टिल एग्रीमेंट’ के तहत पाकिस्तान को दो मुख्य नहरों से पानी मिलता रहा, जो 31 मार्च 1948 तक लागू रहा।
1 अप्रैल 1948 को यह समझौता खत्म होते ही भारत ने नहरों का पानी रोक दिया, जिससे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की 17 लाख एकड़ जमीन पर खेती प्रभावित हुई।
इसके बाद वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में लंबी बातचीत के बाद 19 सितंबर 1960 को कराची में भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच समझौता हुआ, जिसे सिंधु जल संधि कहा जाता है।
पाकिस्तान के लिए संभावित संकट
भारत के पास रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का नियंत्रण है।
सिंधु, झेलम और चिनाब नदियां पाकिस्तान की 80% सिंचाई जरूरतें पूरी करती हैं और 70% पेयजल का स्रोत हैं।
पानी रुकने की स्थिति में खरीफ और रबी दोनों सीजन की बुवाई और कटाई प्रभावित होगी।
लाहौर, कराची और इस्लामाबाद जैसे शहरों में पीने के पानी की गंभीर कमी हो सकती है।
इसके अलावाअर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला टेक्सटाइल सेक्टर, जो उसके कुल निर्यात का 60% है, पानी की कमी से बुरी तरह प्रभावित होगा।
पाकिस्तान की लगभग 33% बिजली हाइड्रो पावर से आती है, जो पानी रुकने पर प्रभावित होगी।
तनाव के नतीजे और आगे क्या होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि पानी के मुद्दे पर भारत-पाकिस्तान के बीच टकराव नया नहीं है, लेकिन इस बार हालात गंभीर हैं क्योंकि यह मामला सीधे-सीधे आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ गया है।
अगर भारत अपने प्रोजेक्ट्स को तेज गति से आगे बढ़ाता है, तो पाकिस्तान के लिए पानी संकट वास्तविक खतरा बन सकता है।
कई अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि लगातार बढ़ती बयानबाजी और युद्ध की धमकियां दक्षिण एशिया के लिए गंभीर सुरक्षा संकट पैदा कर सकती हैं।
वहीं भारत की ओर से साफ संकेत है कि अब वह पुराने ढर्रे पर लौटने को तैयार नहीं है और आतंकवाद के मुद्दे को आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर भी चुनौती देगा।
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