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दिल्ली। ईरान जंग का असर चारो तरफ दिखने लगा है। बात सिर्फ सिलिंडर और ईंधन तक नहीं है। शराब और पानी भी इससे बेअसर नहीं। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब भारत की रोज़मर्रा की चीज़ों की कीमतों पर असर डालने लगा है। पानी की प्लास्टिक की बोतलें और दारु की
ग्लास (कांच) वाली बोतल भी महंगी होगी। इससे दारु के दाम भी बढ़ेंगे
खासतौर पर बोतलबंद पानी और बीयर पर। भारत में बढ़ते गर्मी के कारण कई हिस्सों में तापमान 45°C तक पहुंचने की आशंका है। ऐसे समय में पानी की मांग बढ़ती है, लेकिन इसी बीच कच्चे माल की कीमतों में उछाल ने बोतलबंद पानी उद्योग पर दबाव बढ़ा दिया है। इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है।
दुनिया की लगभग 20% तेल और गैस सप्लाई होरमुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है। अमेरिका, इज़राइल और ईरान के संघर्ष के कारण यहां शिपिंग प्रभावित हुई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।
भारत, जो अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, इस असर को सीधे महसूस कर रहा है.कच्चे तेल से बनने वाला पीईटी प्लास्टिक बोतलों का मुख्य कच्चा माल है। इसकी कीमत 115 रुपये प्रति किलो से बढ़कर करीब 180 रुपये प्रति किलो हो गई है. इससे बोतल बनाने की लागत बढ़ गई है।
इसका असर भी बाजार में दिखने लगा है. बिसलेरी ने हाल ही में अपने दाम बढ़ाए हैं, जबकि बेली और क्लियर प्रीमियम वाटर जैसे ब्रांड्स ने भी कीमतें बढ़ानी शुरू कर दी हैं। हालांकि कई कंपनियां अभी अतिरिक्त लागत खुद वहन कर रही हैं, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करना मुश्किल है. महाराष्ट्र में करीब 20% बोतल निर्माण इकाइयों ने उत्पादन अस्थायी रूप से बंद कर दिया है, जिससे सप्लाई पर भी असर पड़ा है।
बीयर इंडस्ट्री भी इससे अछूती नहीं है। ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक, ग्लास बोतलों की कीमतें करीब 20% तक बढ़ गई हैं. हेनेकेन और कार्ल्सबर्ग जैसी कंपनियां अब राज्यों से 12–15% तक कीमत बढ़ाने की मांग कर रही हैं।
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