दिल्ली में वाणिज्यिक वाहनों से वसूले जा रहे ग्रीन टैक्स पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सवाल उठाए, कहा—जब टैक्स की रकम प्रदूषण नियंत्रण में खर्च नहीं हो रही तो आम जनता से वसूली का क्या औचित्य, अनुदान देकर व्यवस्था सुधारने का दिया सुझाव
दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाणिज्यिक वाहनों पर लगाए जा रहे पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क, जिसे आम तौर पर ग्रीन टैक्स कहा जाता है, एक बार फिर चर्चा में है।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने इस टैक्स की उपयोगिता पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे समाप्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर इस शुल्क से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल प्रदूषण नियंत्रण के लिए नहीं किया जा रहा, तो ऐसी वसूली जनता पर अनावश्यक बोझ है।
एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने बताया कि उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री के सामने भी यह मुद्दा रखा है। उन्होंने कहा कि एक बैठक में जब उन्होंने नगर निगम से पूछा कि पर्यावरण सुधार के लिए उनके स्तर पर क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं,
तो जवाब संतोषजनक नहीं था। इसी संदर्भ में उन्होंने तीखे शब्दों में कहा अगर हरित गतिविधियों में योगदान नहीं है, तो फिर टोल या ग्रीन टैक्स वसूलने का औचित्य क्या है?
ग्रीन टैक्स का मूल उद्देश्य राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना बताया जाता रहा है। यह शुल्क उन वाणिज्यिक वाहनों से लिया जाता है, जो दिल्ली की सीमाओं में प्रवेश करते हैं,
और यह सामान्य टोल टैक्स के अतिरिक्त होता है। वर्ष 2015 में Supreme Court of India के निर्देशों के बाद इसे लागू किया गया था, ताकि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की आवाजाही पर अंकुश लगाया जा सके और वायु गुणवत्ता में सुधार हो।
हालांकि, गडकरी का कहना है कि जब उनके मंत्रालय ने इस टैक्स से इकट्ठा की गई राशि के इस्तेमाल की जानकारी मांगी, तो यह सामने आया कि धन का उपयोग अपने घोषित उद्देश्य के अनुरूप नहीं हो रहा।
उन्होंने इसे व्यवस्था की विफलता बताते हुए कहा कि केवल टैक्स वसूलना समाधान नहीं है, बल्कि उसके सही उपयोग से ही परिणाम सामने आ सकते हैं।
मंत्री ने यह भी बताया कि Municipal Corporation of Delhi के अधिकारियों का तर्क है कि यह शुल्क नगर निगम की आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इस पर गडकरी ने वैकल्पिक सुझाव देते हुए कहा कि अगर आय की समस्या है,
तो दिल्ली सरकार नगर निगम को 800 से 900 करोड़ रुपये का सीधा अनुदान दे सकती है। इससे एक ओर नगर निगम की वित्तीय जरूरतें पूरी होंगी और दूसरी ओर आम लोगों तथा ट्रांसपोर्टरों को अतिरिक्त कर से राहत मिलेगी।
इसके साथ ही नितिन गडकरी ने यह भी संकेत दिया कि उन्होंने इस विषय में हस्तक्षेप के लिए अपील की है, ताकि शीर्ष अदालत अपने पुराने आदेश पर दोबारा विचार कर सके। उनका मानना है कि प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर लगाए गए शुल्क तभी उचित हैं, जब उनके ठोस और सकारात्मक परिणाम ज़मीन पर दिखाई दें।
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