पंकज मुकाती (Editor Politicswala)
पिछले एक सप्ताह से मध्यप्रदेश में कांग्रेस के नेताओं का बीजेपी में शामिल होने का मौसम चल रहा है। शुक्रवार को भी इंदौर और महू के दो बड़े नेता बीजेपी में शामिल हुए। कांग्रेस के नेताओं को जोड़ना भाजपा की सोची समझी रणनीति है। प्रतिदिन कोई न कोई भाजपा के मंच पर भगवा दुपट्टा ओढ़ रहा है। संगठन को इसके लिए शाबाशी मिले। इस दुपट्टा डालो आयोजन की तस्वीरें रोज सामने आ रही है।
इन तस्वीरों में एक बात को सबसे ज्यादा अखरती है, वो है मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का हर तस्वीर में मौजूद रहना। चाहे किसी भी स्तर का नेता शामिल हो रहा हो सीएम भी मौजूद रहते ही हैं। क्या मुख्यमंत्री का निजी अमला, उनके राजनीतिक सलाहकार अभी तक ऐसा कोई प्रोटोकॉल खड़ा नहीं कर पाए कि मुख्यमंत्री किन कार्यकर्मों में जाएंगे।
दरअसल, ये पूरा काम संगठन का है। इसमें सत्ता के मुखिया की हर वक्त मौजूदगी उनकी गरिमा को प्रभावित करती हैं। डॉ. मोहन यादव बेहद सरल और सहज हैं। भाजपा संगठन इस सहजता का फायदा उठाकर उनके पद की गरिमा से न्याय नहीं कर रहा है। किसी बड़े नेता के कांग्रेस में शामिल होने पर सीएम का वहां मौजूद रहना अच्छा है। पर सीएम को किस-किस आयोजन में नहीं रहना है, ये उनके अफसरों को समझना चाहिए।
मुख्यमंत्री के आसपास जो अफसर/सलाहकार हैं, उनकी नीयत और समझ दोनों इससे सवालों के घेरे में आती है। शुक्रवार को इंदौर से पंकज संघवी और महूसे कांग्रेस के नेता रहे अंतरसिंह दरबार बीजेपी में शामिल हुए। क्या इन दोनों नेताओं का कद इतना बड़ा है कि प्रचंड बहुमत वाली सरकार के मुखिया को इनकी आगवानी के लिए खड़ा रहना चाहिए? आखिर क्यों मुख्यमंत्री के प्रोटोकॉल को कमजोर किया जा रहा है। ये लक्ष्मण रेखा अफसर और बड़े नेता कब खीचेंगे कि प्रदेश के मुख्यमंत्री इन कार्यकर्मों में शिरकत नहीं करेंगे
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