भोपाल
नवरात्रि और गरबा का सीजन शुरू होने से पहले होते ही शहर का सियासी और सामाजिक पारा चढ़ गया है। पिछले कुछ सालों से जहां हिंदू संगठन गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री का कड़ा विरोध करते रहे हैं, वहीं इस बार समीकरण एक नया मोड़ ले चुके हैं। अब हिंदू संगठनों के बाद खुद मुस्लिम धर्मगुरुओं और संगठनों ने भी मुस्लिम युवाओं के गरबा में शामिल होने पर पूरी पाबंदी का ऐलान कर दिया है।
मुफ्ती ने जारी किया वीडियो
भोपाल के मुफ्ती मोहम्मद गुफरान खान नदवी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर हलचल मचा दी है। मुफ्ती नदवी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि मुस्लिम युवाओं का हिंदू रस्मों और गरबा में शिरकत करना सरासर 'हराम' है। उन्होंने चेतावनी दी कि दूसरी कौम की परंपराओं का अनुकरण करना समाज के लिए फितने (विवाद) का कारण बनता है, इसलिए युवाओं को अपने दोस्तों के साथ भी गरबा पंडालों में जाने से तौबा करनी चाहिए।
मुस्लिमों से न जाने की अपील की
इसी कड़ी में ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी भी खुलकर सामने आ गई है। कमेटी ने समुदाय के लोगों से अपील की है कि वे गरबा आयोजनों से पूरी तरह दूर रहें। अध्यक्ष शेख इस्माइल खान का कहना है कि यह कदम किसी धर्म के विरोध में नहीं, बल्कि आपसी विवादों से बचने और शांति बनाए रखने के लिए उठाया गया है। इसके लिए अब जिलों में विशेष अभियान भी चलाया जाएगा।
मध्य प्रदेश में पहले भी हुए हैं विवाद
मध्य प्रदेश में गरबा पंडाल हमेशा से सियासत का केंद्र रहे हैं। महू से बीजेपी विधायक उषा ठाकुर पहले ही गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक और पहचान पत्र की जांच की कड़ी मांग उठा चुकी हैं। पिछले वर्षों में भी पहचान छिपाकर पंडालों में एंट्री को लेकर कई बड़े विवाद और हंगामे सामने आए थे।
गौरतलब है कि अब स्थिति यह बन गई है कि एक तरफ हिंदू संगठन पंडालों के दरवाजे बंद करने पर अड़े हैं तो दूसरी तरफ मुस्लिम उलेमाओं ने भी अपने समाज के युवाओं के लिए पाबंदी का दायरा खींच दिया है। इस दोतरफा माहौल के बीच भोपाल का इस बार का गरबा सीजन तीखी बयानबाजी और गर्माहट के साथ सुर्खियों में आ गया है।
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