MP Teachers Protest

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भोपाल में 36 दिन से शिक्षकों का धरना, महिलाओं की मुश्किलें बढ़ीं

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मध्य प्रदेश में पदवृद्धि की मांग को लेकर शिक्षक 36 दिन से भोपाल में धरने पर हैं। महिलाओं ने वॉशरूम, बारिश और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बताईं।

भोपाल में पदवृद्धि और दूसरी काउंसलिंग की मांग को लेकर मध्य प्रदेश के शिक्षक पिछले 36 दिनों से धरने पर बैठे हैं। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए शिक्षकों में महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। लंबे समय से सड़क पर चल रहे इस आंदोलन के बीच धरनास्थल पर रहने वाले शिक्षकों को अब रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतों के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

महिला शिक्षकों का कहना है कि धरनास्थल पर सबसे बड़ी समस्या वॉशरूम की है। सागर से आईं शिक्षिका रुचि सैनी के मुताबिक महिलाओं को पीरियड्स के दौरान काफी दिक्कत होती है। वॉशरूम दूर होने के कारण बार-बार वहां जाना मुश्किल होता है।

उनका दावा है कि कई महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी और इंफेक्शन भी हुआ है। दूसरी शिक्षिका दीप्ति सिंह ठाकुर ने बताया कि कई बार तीन से चार दिन तक नहाने की सुविधा नहीं मिल पाती।

बारिश ने भी आंदोलनकारियों की मुश्किल बढ़ा दी है। शिक्षकों के मुताबिक रात में सड़क किनारे पॉलिथीन के सहारे सोना पड़ता है। आसपास से लगातार वाहन गुजरते रहते हैं। बारिश में खाना बनाने का सामान भीग जाने से राशन खराब होने की बात भी शिक्षकों ने कही है। महिलाओं ने रात के समय सड़क किनारे रहने को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंता भी जताई है।

धरने में शामिल कुछ शिक्षक लंबे समय से भूख हड़ताल कर रहे हैं। राजगढ़ के नरेंद्र राजपूत का कहना है कि वह अब तक 17 दिन भूख हड़ताल कर चुके हैं। इसमें लगातार 12 दिन का उपवास भी शामिल है। उन्होंने निर्जल अनशन भी किया था, लेकिन तबीयत बिगड़ने के बाद साथियों ने उन्हें पानी पिलाया।

शिक्षकों का दावा है कि आंदोलन के दौरान कई लोगों की तबीयत खराब हुई और करीब 50 साथी इलाज के लिए अस्पताल तक पहुंच चुके हैं। कुछ शिक्षक बीमारी के कारण कई दिनों से धरनास्थल पर वापस नहीं लौट पाए हैं।

आंदोलनकारियों की मुख्य मांग वर्ग-2 में 10 हजार और वर्ग-3 में 25 हजार पद बढ़ाने तथा दूसरी काउंसलिंग शुरू करने की है। शिक्षकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में जरूरत के मुकाबले शिक्षकों की संख्या कम है। उनका दावा है कि प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में कई जगह विषयवार शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है।

19 सितंबर को इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शिक्षिका दीप्ति सिंह ठाकुर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी शिक्षक आंदोलन को लेकर बातचीत की थी। शिक्षकों के मुताबिक उन्होंने आंदोलन और नरेंद्र राजपूत के अनशन की जानकारी दी। राहुल गांधी ने आंदोलन में शामिल होने की बात कही थी।

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