दमोह में अंडे का ठेला लगाने वाले प्रिंस सुमन के नाम पर करीब 49.24 करोड़ के लेनदेन का नोटिस आया। फर्जी कंपनी और दस्तावेजों के इस्तेमाल का शक है।
मध्य प्रदेश के दमोह जिले से इनकम टैक्स विभाग से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां सड़क किनारे ठेले पर अंडे बेचकर परिवार का गुजारा करने वाले एक युवक के पास आयकर विभाग का ऐसा नोटिस पहुंचा,
जिसमें करीब 50 करोड़ रुपये के वित्तीय लेनदेन का हिसाब मांगा गया है। नोटिस मिलने के बाद युवक और उसके परिवार की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इतनी बड़ी रकम से उसका कोई लेना-देना होने से वह साफ इनकार कर रहा है।
मामला दमोह जिले के पथरिया थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। यहां वार्ड नंबर 14 में रहने वाले प्रिंस सुमन रोजाना हाथ ठेले पर अंडे बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं। प्रिंस के मुताबिक, उन्होंने कभी दिल्ली में कोई कारोबार नहीं किया और न ही उनके पास करोड़ों रुपये के लेनदेन की क्षमता है। इसके बावजूद दिल्ली के आयकर विभाग की ओर से उन्हें वित्तीय लेनदेन से संबंधित नोटिस भेज दिया गया।
जानकारी के मुताबिक, प्रिंस को मार्च 2025 में आयकर विभाग की ओर से नोटिस प्राप्त हुआ। इसमें वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान हुए 49 करोड़ 24 लाख 57 हजार 217 रुपये के लेनदेन से संबंधित जानकारी मांगी गई थी।
नोटिस में आयकर रिटर्न, कारोबार से संबंधित वार्षिक स्टेटमेंट, खाते का विवरण, खरीदी गई सामग्री के बिल और वाउचर, माल के परिवहन से जुड़े दस्तावेज और बैंक स्टेटमेंट समेत कई रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए कहा गया था।
यह नोटिस आयकर अधिनियम 1961 की धारा 133(6) के तहत जारी किया गया था। इतनी बड़ी रकम का जिक्र देखकर प्रिंस खुद भी हैरान रह गए। उन्होंने मामले को समझने के लिए नोटिस एक वकील को दिखाया। इसके बाद उन्हें जानकारी मिली कि उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल कथित तौर पर दिल्ली में किसी कंपनी से जुड़े वित्तीय लेनदेन में किया गया हो सकता है।
प्रिंस का कहना है कि उन्होंने दिल्ली में कभी कोई कंपनी नहीं खोली और न ही वह इस तरह के किसी कारोबार से जुड़े हैं। उनका दावा है कि वह आज तक दिल्ली तक नहीं गए हैं।
ऐसे में उनके नाम और दस्तावेजों के आधार पर यदि कोई कंपनी या वित्तीय कारोबार संचालित किया गया है तो इसकी जांच होनी चाहिए।
प्रिंस ने पूरे मामले में दस्तावेजों के दुरुपयोग की आशंका जताते हुए संबंधित विभागों से कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि वह सामान्य तरीके से अंडे बेचकर अपना परिवार चलाते हैं और करोड़ों रुपये के किसी कारोबार की उन्हें जानकारी नहीं है। ऐसे में आयकर विभाग से मिले नोटिस ने उनके सामने नई परेशानी खड़ी कर दी है।
बताया जा रहा है कि मामले की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस और आयकर विभाग को आवेदन देकर पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की गई है।
अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रिंस के दस्तावेजों का इस्तेमाल किस तरह किया गया और करीब 49.24 करोड़ रुपये के बताए जा रहे वित्तीय लेनदेन का वास्तविक संबंध किससे है।
यह मामला एक बार फिर लोगों के दस्तावेजों के गलत इस्तेमाल से जुड़े जोखिम की ओर भी ध्यान खींचता है। किसी व्यक्ति के पहचान संबंधी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके उसके नाम पर कंपनी, बैंक खाता या अन्य वित्तीय गतिविधियां संचालित किए जाने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति को बाद में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
फिलहाल प्रिंस सुमन का कहना है कि उन्हें इस पूरे लेनदेन की कोई जानकारी नहीं है और मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
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