भोपाल के अक्षय हॉस्पिटल में आयुष्मान योजना की जांच के दौरान कई अनियमितताएं मिलीं। भुगतान और नए मरीजों के पंजीयन पर रोक, कारण बताओ नोटिस जारी।
भोपाल में आयुष्मान भारत निरामयम् योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों और अस्पतालों से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। चार इमली क्षेत्र स्थित अक्षय हॉस्पिटल अब आयुष्मान योजना की जांच के दायरे में आ गया है।
अस्पताल में योजना के तहत इलाज और मरीजों की भर्ती को लेकर निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच के बाद अस्पताल का आयुष्मान योजना के तहत भुगतान रोक दिया गया है। इसके साथ ही अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए नए मरीजों के पंजीयन पर भी रोक लगाई गई है।
दरअसल, आयुष्मान भारत निरामयम् योजना का उद्देश्य पात्र लोगों को तय मानकों के अनुसार गुणवत्तापूर्ण और कैशलेस इलाज उपलब्ध कराना है। इसी व्यवस्था की निगरानी के तहत आयुष्मान भारत की टीम ने भोपाल के चार इमली स्थित अक्षय हॉस्पिटल का निरीक्षण किया। टीम की जांच में अस्पताल की कार्यप्रणाली से जुड़े कई ऐसे पहलू सामने आए, जिन्हें योजना के नियमों के अनुरूप नहीं माना गया।
निरीक्षण के दौरान अस्पताल के आईसीयू में भर्ती मरीजों की स्थिति की भी जांच की गई। टीम को ऐसे मरीज आईसीयू में भर्ती मिले, जिनकी हालत के मुताबिक उन्हें आईसीयू स्तर की निगरानी की आवश्यकता नहीं थी। कुछ मरीज सामान्य और स्थिर स्थिति में पाए गए, फिर भी उन्हें आईसीयू में रखा गया था। इस तरह की भर्ती को लेकर जांच टीम ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
अस्पताल में उपलब्ध डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की स्थिति भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिली। जांच के दौरान यहां BHMS डॉक्टर के कार्यरत होने की बात सामने आई। वहीं कुछ नर्सिंग स्टाफ ऐसे मिले, जो B.Sc. Nursing के विद्यार्थी थे और उनका पाठ्यक्रम अभी पूरा नहीं हुआ था। आयुष्मान योजना के तहत अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए निर्धारित स्टाफ और योग्यताओं के मानकों का पालन जरूरी होता है।
जांच में मरीजों से अतिरिक्त राशि लिए जाने का मामला भी सामने आया। आयुष्मान योजना के अंतर्गत इलाज करा रहे कुछ हितग्राहियों से ब्लड और अलग-अलग जांचों के लिए पैसे लिए जाने की जानकारी मिली। जबकि योजना के पैकेज में शामिल सेवाओं के लिए मरीज से अलग से भुगतान लेना नियमों के मुताबिक उचित नहीं है। इस बिंदु को भी जांच में गंभीरता से लिया गया है।
निरीक्षण के दौरान आईसीयू में भर्ती मरीजों से संबंधित रिकॉर्ड और मेडिकल जांच रिपोर्टों की भी पड़ताल की गई। इस दौरान कुछ मरीजों की एक्स-रे रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने की जानकारी सामने आई। इससे अस्पताल में रिकॉर्ड संधारण और मरीजों के इलाज से जुड़े दस्तावेजों को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।
इन तमाम कमियों और अनियमितताओं को देखते हुए अक्षय हॉस्पिटल के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा आयुष्मान भारत निरामयम् योजना के तहत अस्पताल का भुगतान रोक दिया गया है और नए मरीजों के आयुष्मान योजना में पंजीयन पर भी फिलहाल रोक लगा दी गई है। अस्पताल के खिलाफ निलंबन या डी-एम्पैनलमेंट की कार्रवाई को लेकर भी नियमानुसार प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
आयुष्मान भारत निरामयम्, मध्यप्रदेश के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अरविंद शाह के मुताबिक, योजना से जुड़े अस्पतालों में पात्र हितग्राहियों को निर्धारित नियमों और मानकों के अनुसार उपचार देना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि बिना जरूरत आईसीयू में भर्ती करना, आवश्यक चिकित्सकीय एवं नर्सिंग स्टाफ का निर्धारित मानकों के मुताबिक उपलब्ध नहीं होना और मरीजों से अनुचित राशि लेना जैसी शिकायतों को गंभीरता से देखा जाएगा।
अरविंद शाह के अनुसार, आयुष्मान योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए अस्पतालों की लगातार निगरानी की जा रही है। निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली गड़बड़ियों के आधार पर संबंधित अस्पतालों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। अक्षय हॉस्पिटल के मामले में भी भुगतान रोकने के साथ आगे की प्रक्रिया जारी है।
भोपाल में आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों पर कार्रवाई का यह सिलसिला पहले भी देखने को मिला है। सिद्धांता हॉस्पिटल, मारुति हॉस्पिटल और ग्रीन सिटी हॉस्पिटल के बाद अब अक्षय हॉस्पिटल का नाम भी जांच और कार्रवाई से जुड़ गया है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर निजी अस्पतालों में योजना के नियमों के उल्लंघन के मामले लगातार सामने आते रहे, तो गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए आयुष्मान योजना के तहत इलाज के विकल्प कितने सुरक्षित और आसान रहेंगे।
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