भोपाल किसान आंदोलन: मूंग खरीदी को लेकर मुख्यमंत्री आवास घेराव के लिए कूच

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भोपाल किसान आंदोलन: मूंग खरीदी को लेकर मुख्यमंत्री आवास घेराव के लिए कूच

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल मंगलवार को किसानों के बड़े प्रदर्शन की गवाह बनी। मूंग की शत-प्रतिशत सरकारी खरीदी, खाद की कमी और अन्य कृषि संबंधी मांगों को लेकर बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टरों के साथ मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने निकले।

रास्ते में पुलिस ने आरआरएल तिराहे पर बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया। इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। आंदोलन ने प्रदेश की कृषि व्यवस्था और सरकार की नीतियों पर कई सवाल खड़े कर दिए।

किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को सरकार के सामने रख रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं निकलने के कारण उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा। उनका आरोप है कि मूंग की पूरी सरकारी खरीदी नहीं होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि खाद की कमी ने खेती की लागत और चिंता दोनों बढ़ा दी हैं।

इस बीच केंद्र सरकार की कृषि नीतियों पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। वर्तमान में केंद्रीय कृषि मंत्रालय की जिम्मेदारी शिवराज सिंह चौहान के पास है, जो मध्य प्रदेश के चार बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं और खुद को किसान हितैषी नेता बताते रहे हैं।

विपक्ष का कहना है कि यदि उनके गृह राज्य में ही किसान अपनी फसल की खरीदी और खाद जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए आंदोलन करने को मजबूर हैं, तो कृषि व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल उठते हैं।

प्रदर्शन कर रहे किसानों की प्रमुख मांगों में मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, खाद की पर्याप्त उपलब्धता, कथित अमेरिकी ट्रेड डील को रद्द करने और किसानों से किए गए सरकारी वादों को पूरा करने की मांग शामिल है। किसानों का कहना है कि ये उनकी आजीविका से जुड़े मुद्दे हैं और सरकार को इन पर जल्द निर्णय लेना चाहिए।

राजनीतिक स्तर पर भी इस आंदोलन को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार की ओर से प्रदर्शन और किसानों की मांगों को लेकर अलग-अलग स्तर पर प्रतिक्रिया सामने आ रही है। हालांकि इस मामले में सरकार की ओर से सभी मांगों पर कोई अंतिम निर्णय अभी तक घोषित नहीं किया गया है।

मध्य प्रदेश में किसानों के आंदोलन का यह नया दौर ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में कृषि, रोजगार और अन्य जनसरोकार के मुद्दों पर अलग-अलग राज्यों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दतिया उपचुनाव सहित प्रदेश की राजनीति पर भी इस आंदोलन का असर पड़ सकता है।

किसानों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती है तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जा सकता है। दूसरी ओर प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शन को नियंत्रित करने में जुटा है। आने वाले दिनों में सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी

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